चेन्नई , अप्रैल 10 -- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान के लिए श्रीहरिकोटा में शुक्रवार को पैराशूट सिस्टम का सफलतापूर्वक परीक्षण किया।

यह परीक्षण (इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट) यह सुनिश्चित करने के लिए था कि जब हमारे अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष से वापस लौटें, तो उनका यान सुरक्षित तरीके से समुद्र में उतरे।

इस खास टेस्ट के लिए भारतीय वायुसेना के 'चिनूक' हेलीकॉप्टर की मदद ली गई। हेलीकॉप्टर ने गगनयान के 'क्रू मॉड्यूल' जैसे दिखने वाले 5,700 किलोग्राम के एक भारी-भरकम ढांचे को हवा में करीब तीन किलोमीटर की ऊंचाई तक उठाया और वहां से समुद्र में छोड़ दिया।

जैसे ही यह मॉड्यूल नीचे गिरने लगा, एक-एक करके 10 पैराशूट एक तय क्रम में खुले। इन पैराशूटों ने मॉड्यूल की गिरने की रफ्तार को इतना कम कर दिया कि वह बहुत ही आराम से समुद्र के पानी से टकराया। इसके बाद भारतीय नौसेना की मदद से मॉड्यूल को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

उल्लेखनीय है कि जब अंतरिक्ष यात्री अपनी यात्रा पूरी कर वापस धरती पर लौटते हैं, तो उनका यान बहुत तेज रफ्तार से नीचे आता है। अगर उसकी रफ्तार कम न की जाए, तो टकराने से बड़ा हादसा हो सकता है। आज के परीक्षण ने यह साबित कर दिया कि इसरो के बनाए पैराशूट सिस्टम अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी कराने में पूरी तरह सक्षम हैं।

गगनयान मिशन के तहत भारत का लक्ष्य तीन अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी से 400 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष में भेजना है। ये यात्री वहां तीन दिन बिताएंगे और फिर उन्हें सुरक्षित वापस धरती पर लाया जाएगा।

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