बैतूल , मई 7 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में चर्चित सिरप कांड में अपने चार वर्षीय बेटे को खोने वाले एक परिवार को इलाज में खर्च हुई राशि के लिए अब भी सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। परिवार का आरोप है कि आश्वासन के बावजूद निजी अस्पतालों में हुए उपचार का खर्च अब तक नहीं मिला है।

आमला विकासखंड के ग्राम कलमेश्वरा निवासी कैलाश यदुवंशी ने बताया कि पिछले वर्ष सामने आए सिरप कांड के दौरान उनके पुत्र कबीर की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। परिवार 25 अक्टूबर को बच्चे का चौथा जन्मदिन मनाने की तैयारी कर रहा था, लेकिन उससे पहले ही उसकी हालत गंभीर हो गई और उसे बैतूल के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

परिजनों के अनुसार कथित जहरीले सिरप के सेवन के बाद बच्चे की तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। डॉक्टरों ने उसके शरीर में ऑर्गन फेल्योर जैसे लक्षण बताए थे। दोनों किडनियों का आकार बढ़ गया था और हीमोग्लोबिन का स्तर भी तेजी से गिर गया था। हालत गंभीर होने पर बच्चे को पहले भोपाल और बाद में नागपुर के नेल्सन हॉस्पिटल ले जाया गया। वहां सुधार नहीं होने पर उसे एम्स नागपुर रेफर किया गया, जहां 5 अक्टूबर को उसकी मृत्यु हो गई।

कैलाश यदुवंशी का कहना है कि बेटे को बचाने के प्रयास में परिवार ने निजी अस्पतालों में लगभग दो लाख रुपए खर्च किए। घटना के बाद गांव पहुंचे उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे ने इलाज खर्च शासन द्वारा दिलाने का आश्वासन दिया था।

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