इटावा , मार्च 31 -- उत्तर प्रदेश के इटावा में करीब 26 वर्ष पुराने मामले में लखनऊ स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने तीन वकीलों को बरी कर दिया है। यह मामला वरिष्ठ अधिवक्ता रणवीर सिंह सेंगर परिवार हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग को लेकर हुए आंदोलन के दौरान हुई झड़प से जुड़ा था। सीबीआई की स्पेशल बेंच की न्यायाधीश मधु डोगरा ने सुनवाई के बाद अधिवक्ता सुनील टंडन, सुनील बाजपेई और धर्मेंद्र मिश्रा को आरोपों से मुक्त कर दिया। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में असफल रहा। अधिवक्ता राजपाल सिंह भदोरिया के अनुसार, इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेंद्र सिंह यादव और अवनीश चौहान को भी आरोपी बनाया गया था, लेकिन सुनवाई के दौरान उनके निधन के चलते उनके नाम कार्यवाही से हटा दिए गए।

उल्लेखनीय है कि इटावा के सिविल लाइन क्षेत्र में वरिष्ठ अधिवक्ता रणवीर सिंह सेंगर, उनकी पत्नी शशि प्रभा और उनकी वकील बेटियों इंदु व बीना सेंगर की निर्मम हत्या के बाद वकीलों ने सीबीआई जांच की मांग को लेकर आंदोलन किया था। इसी दौरान तत्कालीन डीएम और एडीएम के साथ झड़प व पथराव की घटना हुई थी, जिसके बाद कई वकीलों पर विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।

सीबीआई ने वर्ष 2010 में जांच के बाद आरोप पत्र दाखिल किया था, जिसमें भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं तथा सीएलए एक्ट के तहत आरोप लगाए गए थे। मामले की लंबी सुनवाई के बाद अंततः अदालत ने तीनों आरोपित वकीलों को बरी कर दिया।

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