इटावा , फरवरी 04 -- उत्तर प्रदेश के इटावा के फिशरवन में मुस्लिम आक्रांता मोहम्मद गोरी के सेनापति शमसुद्दीन की अवैध मजार पर पांच फरवरी को सुनवाई के बाद बुलडोजर एक्शन होने की उम्मीद जताई जा रही है।
अवैध मजार मामले में डीएफओ विकास नायक की अदालत में पांच फरवरी को सुनवाई होगी। पूर्वाहन 11 बजे के आसपास से यह सुनवाई इटावा के वन मुख्यालय पर शुरू होगी। अवैध मजार के मामले को डीएफओ विकास नायक ने अपनी अदालत में इसको दर्ज किया गया है।
इटावा वन विभाग के बढ़पुरा रेंज के रेंज अफसर अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि अवैध मजार के मामले में मजार के केयरटेकर फजले इलाही समेत तीन लोगों को नोटिस दिया गया है।
फजले इलाही को मजार से जुड़े हुए जमीनी दस्तावेज जमा करने के निर्देश दिए गए है जब कि डीएम को ज्ञापन देने वाले गुलशेर ओर इंतजार को भी नोटिस दिया गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ऑफिस से आए निर्देश के क्रम में 22 जनवरी तक मजार के केयरटेकर फजले इलाही से जमीन के दस्तावेज मांगे गए थे लेकिन 22 जनवरी की मियाद निकलने के बाद भी जमीन से जुड़ा हुआ कोई दस्तावेज वन विभाग तक नहीं पहुंचा है।
शबे बारात पर आयोजित होने वाले उर्स को पहले ही रद्द कर बड़ी संख्या में मजार के मुख्य रास्ते पर हर किसी की इंट्री पर रोक लगा दी गई है।
फिशर वन में स्थापित मुस्लिम आक्रांता मोहम्मद गौरी के सेनापति शमशुद्दीन की मजार पर वन विभाग, पुलिस और खुफिया विभाग ने पूरे दिन कड़ी चौकसी बरती। हालांकि मंगलवार को यहां होने वाला सालाना उर्स प्रशासन की अनुमति न मिलने के कारण पहले ही स्थगित कर दिया था। इसके बाद भी वहां किसी प्रकार जायरीनों की आवाजाही न हो इसके लिए मजार को जाने वाले बीहड़ी रास्तों को अवरुद्ध कर दिया गया। इस सख्ती के कारण वहां किसी प्रकार की हलचल नहीं दिखी।
वन विभाग में मजार तक जाने वाले रास्ते को पहले ही प्रतिबंधित करते हुए वहां पर एक बोर्ड भी लगा दिया है।वन विभाग के कर्मचारियों की ओर से बड़े-बड़े कटान वाले रास्तों पर कटीली झाड़ियां डाली गई थी। अब मजार तक पहुंचने वाले मुख्य मार्ग के प्रारंभ में ही कटीली झाड़ियां डाल दी गई हैं। जिससे किसी भी तरह से कोई भी व्यक्ति मजार तक न पहुंच सके। अन्य वैकल्पिक रास्तों पर भी विशेष निगाह रखी जा रही है।
बढ़पुरा के वन रेंज अफसर अशोक कुमार शर्मा का कहना है कि फिशरवन में वन विभाग की अधिसूचित भूमि है। यहां किसी प्रकार के निर्माण की इजाजत नहीं दी जा सकती। इसी आधार पर मजार के केयर टेकर फजले इलाही को नोटिस दिया गया। जमीन संबंधी कोई भी दस्तावेज वन विभाग को उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
मजार के केयरटेकर फजले इलाही का दावा है कि फिशरवन में स्थापित मजार करीब 800 और 900 साल पुरानी है। इसका मोहम्मद गोरी के सेनापति शमशुद्दीन से कोई वास्ता नहीं है। इस मजार पर सैकड़ों सालों से मुस्लिम तबके के लोग नमाज अता करने जाते रहे हैं। यह पहला मौका है, जब किसी को वहां जाने की अनुमति नहीं दी गई है। केयर टेकर ने कहा कि उनके पास जमीन के कोई दस्तावेज ना हो लेकिन वे ओर उनके पूर्वज मजार पर 50 सालों से उर्स का आयोजन कटवाते रहे हैं, उर्स रद्द होने से मुस्लिम तबके में खासी नाराजगी बनी हुई है।
एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि वैसे तो मजार वाले मामले को वन विभाग हैंडल कर रहा है। कानून व्यवस्था के मद्देनजर अवैध मजार के रास्ते पर पुलिस की सघन बंदोबस्त किया गया है। ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को निर्देशित किया गया है कि मजार तक कोई भी ना पहुंच सके।
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