नयी दिल्ली , मार्च 18 -- साख निर्धारक एजेंसी इक्रा ने प्रमुख विमान सेवा कंपनी इंडिगो की दीर्घावधि साख को "नकारात्मक कारकों के मद्देनजर निगरानी में" रखा है।
एजेंसी ने बताया बुधवार को जारी रिपोर्ट में इंडिगो की दीर्घावधि साख 'एए' बनाये रखी है, लेकिन पश्चिम एशिया संकट के कारण हवाई क्षेत्रों संबंधी प्रतिबंधों और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को जैसे नकारात्मक कारकों को देखते हुए उसे निगरानी में रखने की घोषणा की है। वहीं, अल्पावधि साख को ए1प्लस पर बरकरार रखा गया है।
रिपोर्ट में कहा गया कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनैतिक संघर्ष के कारण इंडिगो के परिचालन और वित्तीय प्रदर्शन पर दबाव की आशंका है। पश्चिम एशिया की स्थिति के कारण अंतर्राष्ट्रीय हवाई क्षेत्र की उपलब्धता प्रभावित हुई है और कच्चे तेल की कीमत में तेज वृद्धि हुई है।
इक्रा ने कहा है कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण बड़ी संख्या में इंडिगो की उड़ानें रद्द हुई हैं और लंबी दूरी की उड़ानों के मार्ग बदले गये हैं। ब्रेंट क्रूड वायदा की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 102-105 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गयी है। इस साल अब तक रुपया आठ प्रतिशत लुढ़क चुका है।
रिपोर्ट के अनुसार, इंडिगो के कुल व्यय में 35-40 प्रतिशत विमान ईंधन के मद में खर्च होता है। वहीं, ईंधन, रखरखाव और किराये को मिलाकर कंपनी 60 प्रतिशत खर्च सीधे या परोक्ष रुप से डॉलर में करती है। रुपये पर दबाव से कंपनी का खर्च बढ़ा है। इंडिगो और अन्य विमान सेवा कंपनियों ने हाल में ईंधन शुल्क लगाने की घोषणा की है, लेकिन वह बढ़े खर्च की पूरी भरपाई नहीं करती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल दिसंबर में परिचालन में हुए व्यवधान से उबरने में एयरलाइंस सफल रही है, लेकिन यदि पश्चिम एशिया संघर्ष लंबा खिंचता है तो साख घटायी जा सकती है।
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