बीजापुर , फरवरी 06 -- छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के नक्सल प्रभावित पुजारी कांकेर परिक्षेत्र के ग्राम नांबी में इंद्रावती टाइगर रिजर्व से जुड़े क्षेत्र में विकास की नई कहानी लिखी जा रही है। यहां इको-टूरिज्म और होम-स्टे को बढ़ावा देने के लिए आयोजित तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन 06 फरवरी को हुआ। यह पहल राज्य सरकार की आरएएमपी योजना के तहत की गई।

शुक्रवार को जिला पीआरओ से मिली जानकारी के अनुसार,इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन कलेक्टर संबित मिश्रा के दिशा-निर्देश और उपनिदेशक इंद्रावती टाइगर रिजर्व संदीप बलगा के मार्गदर्शन में किया गया। छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (सीएसआईडीसी) नोडल एजेंसी रही, जबकि प्रशिक्षण चॉइस कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दिया गया। इस पूरी पहल को साकार करने में जिला प्रशासन और वन विभाग के सहयोग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रशिक्षण के दौरान ग्रामीणों को होम-स्टे का व्यवसायिक प्रबंधन, अतिथि सत्कार के तरीके, सुरक्षा एवं स्वच्छता मानक, स्थानीय पारंपरिक व्यंजन तैयार करना और पर्यावरण संरक्षण की जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने समझाया कि कैसे इको-टूरिज्म के जरिए वन्यजीवों और स्थानीय संस्कृति को बचाते हुए भी स्थायी आजीविका के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। ग्रामीणों ने इस प्रशिक्षण को अपने गांव के भविष्य के लिए अत्यंत लाभकारी बताया।

यह कार्यक्रम इसलिए भी विशेष है क्योंकि यह पामेड़ और पुजारी कांकेर जैसे उन इलाकों में हो रहा है, जो लंबे समय तक नक्सलवाद की छाया में रहे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिए जाने के बाद ऐसे प्रयासों को इन क्षेत्रों के समग्र विकास की कुंजी माना जा रहा है।

स्थानीय निवासियों का मानना है कि इस पहल से नांबी और आसपास के गांवों के युवाओं को गांव में ही रोजगार मिलेगा। उनका विश्वास है कि अब बीजापुर जिले की पहचान केवल नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे इको-टूरिज्म गंतव्य के रूप में बनेगी, जहां विकास और संरक्षण साथ-साथ चलते हैं।

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