कोझिकोड , जनवरी 23 -- भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने इंसानों से संघर्षों पर पुनर्विचार करने और एकता का रास्ता अपनाने का आग्रह किया।
सुश्री विलियम्स ने केरल के कोझिकोड में आयोजित 'केरल लिटरेचर फेस्टिवल' (केएलएफ) में पृथ्वी पर जीवन के बारे में अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि कैसे अंतरिक्ष से देखने पर पृथ्वी पर राष्ट्रों की सीमाएं गायब हो जाती हैं और पृथ्वी एक साझा घर के रूप में दिखाई देता है।
अंतरिक्ष यात्री ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि एक-दूसरे से लड़ने का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि अंतरिक्ष से देखने पर पृथ्वी एक साझा घर की तरह दिखती है। उन्होंने कहा, "हम सभी एक ही ग्रह पर साथ रहते हैं। यह सोचना मुश्किल है कि इंसान क्यों लड़ते हैं और एक-दूसरे का विरोध करते हैं। हमें इस धरती पर सह-अस्तित्व को अपनाते हुए साथ रहना चाहिए।"सुश्री विलियम्स ने कहा, "जब हम अंतरिक्ष से देखते हैं, तो हमें केवल एक ही स्थान दिखाई देता है जहाँ हम सब रहते हैं और वहाँ कोई राष्ट्रों की सीमाएँ नहीं होतीं।"बाद में सुनीता विलियम्स ने 'ड्रीम्स रीच ऑर्बिट: मीट द एस्ट्रोनॉट हू टच्ड द स्काई' नामक सत्र में भी भाग लिया और अपने विचारों को साझा किया। उन्होंने अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखने के अनुभव का वर्णन करते हुए कहा कि अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखने का अवसर इंसान को एक पल के लिए रुकने और यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि यह सब, यह चमत्कार कैसे हुआ।
अंतरिक्ष में अपने साथ गणेश जी की मूर्ति व 'भगवद गीता' ले जाने के सुश्री विलियम्स निर्णय के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने ने कहा कि मानव अस्तित्व के पीछे निश्चित रूप से कोई उच्च शक्ति है। उन्होंने कहा, "जरूर कोई बड़ी शक्ति रही होगी जिसने हम सबको आज यहाँ होने दिया, इस ग्रह पर हर दिन रहने दिया। इसलिए, मुझे नहीं लगता कि यह (विज्ञान और अध्यात्म) अलग-अलग हैं; अध्यात्म के बारे में सोचना ठीक है और विज्ञान के बारे में सोचना भी ठीक है।"सुश्री विलियम्स ने यह भी टिप्पणी की कि जिस समय उनकी सेवानिवृत्ति की घोषणा हुई, उस समय उनका भारत में होना प्रतीकात्मक लगता है, क्योंकि इससे उन्हें अपना संदेश साझा करने का अवसर मिला।
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