देहरादून , फरवरी 05 -- इंडिया गठबंधन के घटक दलों ने अंकिता भंडारी न्याय के लिए आठ फरवरी को होने जा रही महा पंचायत का समर्थन किया है।

इंडिया गठबंधन के नेताओं ने गुरुवार को देहरादून के राजपुर रोड स्थित कांग्रेस पार्टी के राज्य कार्यालय राजीव भवन में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए अंकिता भंडारी हत्याकांड की केंद्रीय जांच ब्यूरो ( सीबीआई) जांच को ढकोसला करार दिया । कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि यह जांच केवल वीआईपी को बचाने के लिए की जा रही है। इसलिए इंडिया गठबंधन इस जांच को पूरी तरह से खारिज करता है। उन्होंने कहा कि जन भावनाओं के अनुरूप उच्चतम न्यायालय की देखरेख में सीबीआई जांच की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता की शिकायत के आधार पर की जा रही सीबीआई जांच पूरी तरह से छलावा है।

इस केस में जिस शिकायतकर्ता की शिकायत को आधार बनाकर जो जांच की जा रही है वह सरकार द्वारा प्रायोजित शिकायत है। श्री रावत ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड के बाद से उत्तराखंड में सीरीज में जिस तरह महिलाओं की अस्मिता पर डाका डाला जा रहा है ,उनके साथ दुर्व्यवहार, दुष्कर्म किया जा रहे है।

इसमें कामकाजी महिलाएं भी सम्मिलित हैं। पिछले कुछ दिनों में देहरादून जिले में तीन महिलाओं की हत्या कर दी गई। जो दर्शाता है कि राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह चौपट हो गई है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि अंकिता हत्याकांड में भाजपा सरकार शुरू से वीआईपी को बचाने की कोशिश करती आई है। जिस तरह इस केस में संदिग्ध रूप से एक व्यक्ति को प्रवेश करवाकर शिकायतकर्ता बनाया जाता है, उस व्यक्ति का ना तो अंकिता के परिवार से कोई लेना-देना है , ना ही वह व्यक्ति पीड़ित है, और ना ही पक्षकार है। उस व्यक्ति को अगर शिकायतकर्ता बनाया गया है तो फिर से सरकार की कोशिश सीबीआई जांच के जरिए वीआईपी को बचाने की है।

भाकपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के पूर्व सदस्य समर भंडारी ने कहा कि शिकायतकर्ता का अचानक प्रकट होना जांच को संदेह के घेरे में खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता अंकिता की हत्या होने के तीन साल बाद तक कहीं दिखाई नहीं दिए। इसलिए इस पूरे प्रकरण में जिस तरह सरकार का रवैया रहा है, वह बड़े संदेह के घेरे में है।मूलतः अंकिता के माता-पिता के सवालों के आधार पर चार्ज शीट दाखिल करके बुनियादी जांच की जानी चाहिए लेकिन सरकार इससे बच रही है।

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