बैतूल , मार्च 26 -- मध्यप्रदेश में बैतूल जिले के चिचोली क्षेत्र में दो घोड़ों की मौत को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। घोड़ा मालिक ने पशु चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुआवजे की मांग की है, जबकि पशु चिकित्सा विभाग ने प्रारंभिक जांच में बीमारी को मौत का कारण बताया है।
जानकारी के अनुसार चिचोली निवासी जगदीश यादव के पास सफेद रंग के दो घोड़े थे, जिनका उपयोग शादी-विवाह और अन्य सामाजिक आयोजनों में किया जाता था। इन्हीं के माध्यम से उनके परिवार की आजीविका चलती थी। बताया गया कि पिछले कुछ दिनों से दोनों घोड़ों की तबीयत खराब थी, जिसके चलते उन्हें उपचार के लिए स्थानीय पशु चिकित्सक के पास ले जाया गया।
घोड़ा मालिक का आरोप है कि चिकित्सक द्वारा जांच के बाद दोनों घोड़ों को इंजेक्शन लगाया गया, जिसके कुछ ही समय बाद उनकी हालत बिगड़ गई। एक घोड़े की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरे को गंभीर हालत में जिला पशु चिकित्सालय बैतूल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी भी मौत हो गई।
जगदीश यादव के अनुसार दोनों घोड़े काफी कीमती थे और उनकी कुल कीमत लगभग सात से आठ लाख रुपये थी। उन्होंने कहा कि इस घटना से उनके परिवार के सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।
उधर उप संचालक पशु चिकित्सालय बैतूल सुरजीत सिंह राजपूत ने बताया कि मामले की जांच के लिए तीन चिकित्सकों की समिति गठित की गई है। समिति ने दोनों घोड़ों का पोस्टमार्टम कर ब्लड सैंपल जांच के लिए भेजे हैं।
प्रारंभिक जांच में घोड़ों में फाइलेरिया संक्रमण पाया गया है, जिसे मौत का संभावित कारण माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि संबंधित चिकित्सक विभाग में पदस्थ हैं और मामले की विस्तृत जांच जारी है। फिलहाल अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घोड़ों की मौत बीमारी से हुई या उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही जिम्मेदार रही।
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