लखनऊ , जनवरी 19 -- उत्तर प्रदेश में नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाते हुये नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) लोकेश एम को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया है। इसके साथ ही पूरे मामले की गहराई से जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (एसआईटी ) के गठन के आदेश दिए हैं।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित एसआईटी का नेतृत्व मेरठ की मंडलायुक्त करेंगी। टीम में मेरठ जोन के एडीजी और लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता को भी शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री ने एसआईटी को निर्देश दिया है कि वह अगले पांच दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंपे।
गौरतलब है कि 17 जनवरी को कोहरे के कारण सेक्टर-150 में एक निर्माणाधीन स्थल पर खोदे गए करीब 20 फीट गहरे और पानी से भरे गड्ढे में युवराज मेहता की कार गिर गई थी। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची राहत टीम ने घंटों चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद युवराज को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। इस घटना को लेकर राज्य सरकार ने साफ किया है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए हैं कि पीड़ित परिवार को हर हाल में न्याय मिले और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
एसआईटी में मेरठ मंडलायुक्त, एडीजी जोन मेरठ और लाेक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता को शामिल किया गया है। टीम को पांच दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। घटना को लेकर सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या दोष पाए जाने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि पीड़ित परिवार को न्याय मिले और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
इस मामले में युवराज मेहता के पिता राजकुमार मेहता की शिकायत पर नॉलेज पार्क थाना में दो बिल्डरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि निर्माण कार्य और सुरक्षा मानकों में गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसके चलते यह हादसा हुआ। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और सभी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। प्रकरण में विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की गई है। लापरवाही के आरोपों के चलते संबंधित जूनियर इंजीनियर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि जांच के दौरान यदि अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उनके खिलाफ भी कठोर कदम उठाए जाएंगे।
घटना के बाद से इलाके में आक्रोश का माहौल है। परिजन और स्थानीय लोग दोषियों की गिरफ्तारी और सख्त सजा की मांग कर रहे हैं। प्रशासन ने लोगों को आश्वासन दिया है कि जांच निष्पक्ष होगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
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