नयी दिल्ली , जनवरी 25 -- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद देश की अनवरत आर्थिक उन्नति की सराहना करते हुए आत्मनिर्भरता और स्वदेशी को देश के विकास का मूलमंत्र बताया है।
श्रीमती मुर्मु ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली बड़ी अर्थ-व्यवस्था है। विश्व-पटल पर अनिश्चितता के बावजूद देश में निरंतर आर्थिक विकास हो रहा है। उन्होंने कहा, "हम, निकट भविष्य में, विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थ-व्यवस्था बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।"उन्होंने कहा कि विश्व-स्तरीय अवसंरचना के निर्माण में निवेश करके देश अपनी आर्थिक संरचना का उच्च-स्तर पर पुनर्निर्माण कर रहा हैं। आर्थिक नियति के निर्माण की यात्रा में आत्म-निर्भरता और स्वदेशी हमारे मूलमंत्र हैं।
राष्ट्रपति ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को स्वतंत्रता के बाद देश के आर्थिक एकीकरण के लिए सबसे महत्वपूर्ण निर्णय बताते हुए कहा कि इससे "एक राष्ट्र, एक बाजार" की व्यवस्था स्थापित हुई है। जीएसटी में पिछले साल सितंबर में किये गये अगली पीढ़ी के सुधारों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "जीएसटी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के हाल ही के निर्णय से हमारी अर्थव्यवस्था को और अधिक शक्ति मिलेगी।"श्रीमती मुर्मु ने श्रम सुधार के क्षेत्र में चार नयी संहिताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे श्रमिक वर्ग लाभान्वित होगा तथा उद्यमों के विकास को भी गति मिलेगी।
देश के विकास में युवाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने युवाओं को राष्ट्र की विकास यात्रा का ध्वजवाहक बताया। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी की सहायता से संचालित एक अनुभव-आधारित शिक्षा व्यवस्था 'मेरा युवा भारत' युवाओं को नेतृत्व और कौशल-विकास सहित, कई क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों के साथ जोड़ती है। देश में स्टार्टअप की सफलता का श्रेय युवा उद्यमियों को देते हुए उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी की आकांक्षाओं पर केन्द्रित नीतियों तथा कार्यक्रमों के बल पर देश के विकास को गति मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में युवा-शक्ति की प्रमुख भूमिका रहेगी।
राष्ट्रपति ने देश में विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी का उल्लेख करते हुए युवाओं की "असीम प्रतिभा" की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, "हमारे युवा उद्यमी, खिलाड़ी, वैज्ञानिक और पेशेवर देश में नयी ऊर्जा का संचार कर रहे हैं तथा विश्व-स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं।"उन्होंने कहा कि आपसी विश्वास पर आधारित सुशासन पर जोर देकर सरकार और जन-सामान्य के बीच की दूरी को निरंतर कम किया जा रहा है। अनेक अनावश्यक नियमों को निरस्त किया गया है, अनुपालना संबंधी कई बाधाओं को समाप्त किया गया है और आम लोगों के हित में व्यवस्थाओं को सरल बनाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार रोजमर्रा के जीवन को बेहतर बनाने के लक्ष्य के साथ जीवनयापन की आसानी को प्राथमिकता दे रही है।
श्रीमती मुर्मु ने कहा कि पिछले एक दशक के दौरान राष्ट्रीय लक्ष्यों को जनभागीदारी के माध्यम से प्राप्त करने का प्रयास किया गया है। महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियानों को जन-आंदोलन का रूप दिया गया है। गांव-गांव में, नगर-नगर में स्थानीय संस्थाओं को प्रगतिशील बदलाव का माध्यम बनाया गया है।
उन्होंने विकसित राष्ट्र के निर्माण को सभी देशवासियों की साझा जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि समाज में असीम शक्ति होती है। सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को समाज का सक्रिय समर्थन मिलने से क्रांतिकारी बदलाव आते हैं। डिजिटल भुगतान का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इसे लोगों ने बहुत बड़े पैमाने पर अपनाया है। आज दुनिया के आधे से अधिक डिजिटल लेनदेन भारत में होते हैं। छोटी से छोटी दुकान में सामान खरीदने से लेकर ऑटो-रिक्शा का किराया देने तक, डिजिटल भुगतान का उपयोग विश्व समुदाय के लिए प्रभावशाली उदाहरण बन गया है। उन्होंने देशवासियों से अन्य राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी इसी तरह की सक्रिय भागीदारी की उम्मीद जतायी।
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