चंडीगढ़ , अप्रैल 29 -- आयुर्वेदाचार्य प्रो सतीश गंधर्व ने कहा है कि आयुर्वेद केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण जीवनशैली है, जो व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक संतुलन को बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर के बीएएमएस बैच 2023-24 के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, पंचकूला का शैक्षणिक दौरा किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने संस्थान के एडमिन ब्लॉक, हर्बल गार्डन, अस्पताल की ओपीडी और आईपीडी सेवाओं के साथ पंचकर्म, फिजियोथेरेपी और फार्मेसी विभाग का अवलोकन किया।

भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के विभिन्न पहलुओं की व्यावहारिक जानकारी दी गयी। संवाद के दौरान प्रो. गंधर्व ने कहा कि वर्तमान समय में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए आयुर्वेद की उपयोगिता और भी बढ़ गयी है। उन्होंने औषधीय पौधों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आयुर्वेद में पेड़-पौधों का उपयोग जड़ी-बूटियों के रूप में किया जाता है और इनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।

संस्थान के कुलपति प्रो. (डॉ.) संजीव शर्मा और डीन प्रो. गुलाब चंद पमनानी के मार्गदर्शन में बीएएमएस के साथ पंचकर्म कोर्स संचालित किये जा रहे हैं तथा नये पाठ्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. गौरव गर्ग ने बताया कि संस्थान में 12 विशेष ओपीडी संचालित हैं और आईपीडी सुविधा के माध्यम से मरीजों की देखभाल की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन 500 से अधिक रोगी संस्थान से स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं।

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