नयी दिल्ली , जनवरी 28 -- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आयुर्वेद चिकित्सा प्रणाली में आधुनिक प्रौद्योगिकी और कृत्रिम मेधा (एआई) के उपयोग को बढ़ानेपर बल देते हुए बुधवार को कहा कि सरकार की नीतियों और प्रयासों से आज भारत आयुष आधारित चिकित्सा के लिए भ्रमण का एक भारोसे मंद गंतव्यव के रूप में भी उभर रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ हुए समझौते से भारत की आयुष चिकित्सा प्रणालियों के कारोबार को भी बड़ा बल मिलेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार ने आयुष वीजा जैसे कदम उठाये हैं, जिससे विदेशों से आने वाले लोगों को आयुष चिकित्सा की देश में बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं। वह केरल में आर्य वैद्य शाला चैरिटेबल अस्पताल के शताब्दी समारोह को वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। समारोह में केरल के राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर भी शामिल थे।
उन्होंने आर्य वैद्य शाला के कामों की सराहना करते हुए कहा कि इसने आयुर्वेद को साइंस और रिसर्च की कसौटी पर लगातार परखा है। ये वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर काम कर रही है। भेषज अनुसंधान, नैदानिक अनुसंधान और कैंसर केयर पर भी ध्यान दे रहा है। उन्होंने कहा कि आयुष मंत्रालय के सहयोग से, कैंसर पर अनुसंधान के लिए उत्कृष्ट की स्थापना करना, इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
प्रधानमंत्री ने कहा, " अब हमें बदलते समय के अनुसार, आयुर्वेद में आधुनिक टेक्नॉलॉजी और एआई का उपयोग भी बढ़ाना चाहिए। बीमारी की संभावनाओं का पता लगाने के लिए, अलग-अलग पद्धतियों से इलाज के लिए, काफी कुछ नवाचार किये जा सकते हैं।" उन्होंने कहा कि जब साइंस के सिद्धांतों पर आयुर्वेदिक पद्धति को परखा जाता है, तो लोगों का भरोसा और मजबूत होता है।
प्रधानमंत्री ने मंगलवार को घोषित भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते का उल्लेख करते हुए कहा, " मुझे ये बताते हुए खुशी है कि यह व्यापार समझौता, भारत की परम्परागत चिकित्सा सेवाओं और उनके साधकों को एक बड़ा बल देगा। ईयू के उन सदस्य देशों में, जहां इसके लिए अभी विनियमन व्यवस्था मौजूद नहीं हैं, वहां हमारे आयुष की प्रैक्टिस करने वाले, भारत में हासिल की गयी अपनी इस पेशे की योग्यता के आधार पर, अपनी सेवाएं प्रदान कर सकेंगे। इसका बहुत बड़ा लाभ आयुर्वेद और योग से जुड़े हमारे युवाओं को होगा। इस एग्रीमेंट से यूरोप में आयुष वेलनेस केंद्रो की स्थापना में भी मदद मिलेगी। आयुर्वेद-आयुष से जुड़े आप सभी महानुभावों को मैं इस एग्रीमेंट की बधाई देता हूं। "श्री मोदी ने आयुर्वेद को सहेजने, संरक्षित करने और आगे बढ़ाने में आर्य वैद्य शाला के 125 को महत्वपूर्ण बताते हुए कि इसने आयुर्वेद को इलाज की एक सशक्त व्यवस्था के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने इसके संस्थापक वैद्यरत्नम पी एस वरियर आर्य को याद करते हुए कहा कि आयुर्वेद के प्रति उनकी सोच और लोक कल्याण के लिए उनका समर्पण, आज भी हमें प्रेरित करता है।
आर्य वैद्यशाला 600 से अधिक आयुर्वेदिक औषधियों का निर्माण करती है, देश भर में इसके आयुर्वेदिक अस्पताल है। इनमें 60 से अधिक देशों के मरीज उपचार के लिए आ रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, " केरला के लोगों ने आयुर्वेद की जिन परंपराओं को सदियों से जीवंत बनाये रखा है। आप उन परंपराओं का संरक्षण भी कर रहे हैं, संवर्धन भी कर रहे हैं। "प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में लंबे समय तक प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों को अलग कर के रखा जाता रहा। पिछले 10-11 वर्षों में इस सोच में बड़ा बदलाव हुआ है। अब स्वास्थ्य सेवाओं को समग्र नजरिए से देखा जा रहा है। आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथिक, सिद्ध और योग, इन सबको हम एक छतरी के नीचे लाये हैं, और इसके लिए विशेष तौर पर आयुष मंत्रालय बनाया गया है। हमने बीमारियों से रोकथाम पर निरंतर फोकस किया है। इसी सोच के साथ, नेशनल आयुष मिशन शुरू किया गया, 12 हजार से अधिक आयुष वेलनेस सेंटर खोले गये।
श्री मोदी ने कहा, " हमने देश के अन्य अस्पतालों को भी आयुष सेवाओं से जोड़ा, आयुष दवाओं की नियमित आपूर्ति पर भी ध्यान दिया। इसका उद्देश्य साफ है, कि भारत के परंपरागत चिकित्सा इस ज्ञान का लाभ, देश के कोने-कोने के लोगों को मिले। "उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों से आयुष चिकित्सा सामग्री के निर्माण में तेज प्रगति हुई है और इसका विस्तार हुआ है। भारतीय पारंपरिक वेलनेस को दुनिया तक पहुंचाने के लिए, सरकार ने आयुष निर्यात संवर्धन परिषद की स्थापना की है। आयुष उत्पादों और सेवाओं को वैश्वक बाजार मिल रहा है। 2014 में भारत से लगभग तीन हजार करोड़ रुपए के आयुष और हर्बल उत्पादों का निर्यात हुआ था अब इनका निर्यात 6500 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
श्री मोदी ने कहा कि आयुर्वेद जैसी प्राचीन चिकित्सा पद्धति को प्रमोट करने के लिए, सरकार, ब्रिक्स सम्मेलन हाे या जी20 समम्मेलन, हर बड़े मंच पर इसे गर्व से आगे रख रही है। गुजरात के जामनगर में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन- विश्व स्वास्थ्य संगठन के वैश्विक परंपरागत औषधि केंद्र की स्थापना भी की जा रही है। जामनगर में ही आयुर्वेद शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान ने काम करना शुरू कर दिया है। आयुर्वेदिक दवाओं की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए, गंगा नदी के किनारों पर औषधीय खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
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