रामनगर , जनवरी 22 -- उत्तराखंड में रामनगर के वन क्षेत्रों से सटे आबादी वाले इलाकों में लगातार हिरणों की आवाजाही बढ़ती जा रही है, जिससे वन्यजीव विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों की चिंता गहराती जा रही है।
वन्यजीव विशेषज्ञ गणेश रावत एवं संजय छिम्वाल का कहना है कि अब हिरण केवल जंगल की सीमा तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि सीधे आबादी में घुसते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसका सीधा असर मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर पड़ रहा है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार हिरणों का आबादी की ओर आना इस बात का संकेत है कि जंगलों में उनके प्राकृतिक आवास और भोजन पर दबाव बढ़ रहा है। हिरण जहां जाते हैं, उनके पीछे तेंदुए, बाघ जैसे हिंसक वन्यजीव भी आबादी की ओर खिंचे चले आते हैं। इसी वजह से बीते कुछ समय में हमलों और अप्रिय घटनाओं में इजाफा देखा गया है, जो मानव जीवन के साथ-साथ वन्यजीवों के लिए भी गंभीर खतरा बनता जा रहा है।
चिंता का एक बड़ा कारण यह भी है कि कई बार हिरण अचानक सड़क पर आ जाते हैं। इससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है, जिसमें न केवल वाहन चालकों की जान जोखिम में पड़ती है, बल्कि हिरणों की भी मौत या गंभीर चोट की आशंका बनी रहती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति मानव और हिरण, दोनों प्रजातियों के लिए अत्यंत खतरनाक है। ताजा मामला रामनगर के लखनपुर क्षेत्र का है, जहां हिरणों का एक झुंड आबादी के बेहद पास देखा गया। स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी है। वन विभाग और विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं और बढ़ सकती हैं। ऐसे में जंगलों के संरक्षण, भोजन की उपलब्धता और आबादी वाले क्षेत्रों में सतर्कता बेहद जरूरी हो गई है।
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