नयी दिल्ली , मार्च 06 -- दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने कहा है कि आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक एवं पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके सहयोगियों द्वारा 'फांसी घर' के अस्तित्व और स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़े संदर्भों के बारे में गलत जानकारी देकर जनता को शासन और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गुमराह करने का प्रयास किया गया है।

श्री केजरीवाल, दिल्ली विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष राम निवास गोयल तथा पूर्व उपाध्यक्ष राखी बिरला शुक्रवार को विशेषाधिकार समिति के समक्ष उपस्थित हुए और 9 अगस्त 2022 को दिल्ली विधानसभा परिसर में उद्घाटित किये गये 'फांसी घर' की प्रामाणिकता से संबंधित मामले में अपना पक्ष समिति के समक्ष रखा। वहीं, पूर्व उपमुख्यमंत्री श्री मनीष सिसोदिया आज उपस्थित होने पर सहमति देने के बावजूद एक बार फिर समिति के समक्ष उपस्थित नहीं हुए।

विशेषाधिकार समिति के अध्यक्ष प्रद्युम्न सिंह राजपूत ने कहा कि यद्यपि आज संबंधित व्यक्ति समिति के समक्ष उपस्थित हुए, किंतु इससे पूर्व वे बार-बार समिति की कार्रवाई से बचने का प्रयास करते रहे। श्री राजपूत ने कहा कि यह अत्यंत गंभीर विषय है कि उस समय 'फांसी घर' की स्थापना का निर्णय बिना किसी ठोस ऐतिहासिक आधार या तथ्य के बिना कैसे लिया गया। उन्होंने कहा, "यह अत्यंत चिंताजनक है कि इतने उच्च संवैधानिक पदों पर आसीन रहे व्यक्तियों द्वारा आज समिति के समक्ष अपने दावों के समर्थन में एक भी तथ्यात्मक दस्तावेज या प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया जा सका।"समिति अध्यक्ष ने कहा, "'फांसी घर' के संबंध में बिना किसी ऐतिहासिक प्रमाण के किये गये दावों से न केवल जनता को गुमराह किया गया है, बल्कि हमारे शहीदों की स्मृति का भी अपमान हुआ है। समिति आज दर्ज किए गए बयानों के आधार पर आगे की कार्यवाही पर सामूहिक रूप से विचार करेगी।"श्री गुप्ता ने विधानसभा परिसर में पत्रकारों से कहा कि यह मामला औपचारिक रूप से उठाया गया था और विस्तृत जांच के लिए विशेषाधिकार समिति को भेजा गया। उन्होंने कहा कि समिति द्वारा समन जारी किए जाने के बावजूद संबंधित व्यक्तियों ने बार-बार उपस्थित होने से परहेज किया। उन्होंने कहा, "एक बात स्पष्ट रूप से सामने आई है, जिस पर समिति अपनी रिपोर्ट देगी कि समिति के समक्ष बार-बार उपस्थित न होकर उन्होंने सदन की अवमानना और विशेषाधिकार का उल्लंघन किया है।" उन्होंने समिति तथा संविधान के विरुद्ध की गई टिप्पणियों को "निंदनीय और पूर्णतः अस्वीकार्य" बताया।

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