रायपुर , अप्रैल 06 -- छत्तीसगढ़ में आम आदमी पार्टी (आप) ने आगामी डिजिटल जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए पृथक कॉलम नहीं होने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे पिछड़े वर्ग के साथ अन्याय बताया है और इस मुद्दे पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

पार्टी के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष उत्तम जायसवाल ने जारी बयान में कहा कि जनगणना के लिए निर्धारित 33 बिंदुओं में ओबीसी वर्ग के लिए अलग से कॉलम नहीं रखा जाना सरकार के दोहरे मापदंड को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की साय सरकार पिछड़े वर्ग के विकास की बात तो करती हैं, लेकिन जब वास्तविक गणना और आंकड़ों की बात आती है तो ओबीसी वर्ग की अनदेखी की जाती है।

उन्होंने कहा कि राजपत्र के बिंदु क्रमांक 12 में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए स्पष्ट कॉलम का प्रावधान है, लेकिन ओबीसी वर्ग के लिए ऐसा कोई प्रावधान नहीं किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि बिना पृथक कॉलम के ओबीसी वर्ग की वास्तविक जनसंख्या का आंकलन कैसे संभव होगा। उनके अनुसार यह स्थिति पिछड़े वर्ग को उनके अधिकारों से वंचित रखने की साजिश को दर्शाती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर केंद्र सरकार जातिगत जनगणना कराने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर आधिकारिक दस्तावेजों में ओबीसी वर्ग को स्थान नहीं देना विरोधाभासी है।

श्री जायसवाल ने कहा कि इससे देश की सामाजिक समरसता प्रभावित हो सकती है, जबकि भारत विविधता में एकता का प्रतीक रहा है।

इस बीच, सर्व छत्तीसगढ़िया समाज एससी, एसटी, ओबीसी महासंघ ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जताते हुए प्रधानमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। संगठन ने जनगणना में ओबीसी वर्ग के लिए पृथक कॉलम की मांग की है और इसे सामाजिक न्याय के लिए आवश्यक बताया है।

आप ने स्पष्ट किया है कि यदि जनगणना प्रक्रिया में ओबीसी वर्ग के लिए अलग कॉलम शामिल नहीं किया गया, तो छत्तीसगढ़ में व्यापक स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा। पार्टी ने सरकार से मांग की है कि जनगणना में सभी वर्गों को समान रूप से प्रतिनिधित्व देते हुए पारदर्शी और न्यायसंगत व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

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