श्रीनगर , फरवरी 25 -- राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू) के कुलपति डॉ. जे. एम. व्यास ने बुधवार को घोषणा करते हुए कहा कि अपराध स्थलों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जम्मू-कश्मीर में 23 मोबाइल फॉरेंसिक वैन तैनात की गयी हैं।
डॉ. व्यास ने जम्मू-कश्मीर से गुजरात के टूर पर पत्रकारों के एक दल से बातचीत करते हुए कहा, "हां, जम्मू-कश्मीर को 23 मोबाइल फॉरेंसिक वैन उपलब्ध करायी गयी हैं, ताकि आपराधिक न्याय वितरण प्रणाली को और मजबूत किया जा सके। इन वैनों के माध्यम से विशेषज्ञ आवश्यक उपकरणों और गैजेट्स के साथ सीधे अपराध स्थल तक पहुंच सकेंगे। फॉरेंसिक मोबाइल वैन देशभर में शुरू की गयी हैं।"डॉ. व्यास ने विभिन्न प्रकार के मामलों की जांच में एनएफएसयू की भूमिका को उल्लेख किया है। इससे पहले, पुलिस विज्ञान एवं सुरक्षा अध्ययन संकाय के डीन प्रो. अक्षत मेहता ने बताया कि एनएफएसयू छह माह के विशेष कार्यक्रम के तहत "साइबर कमांडो" को प्रशिक्षित करता है। उन्होंने कहा कि इंटरपोल के अधिकारी भी यहां प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं और दुनिया भर के विशेषज्ञ विश्वविद्यालय की विशेषज्ञता से लाभान्वित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि "तारीख पर तारीख" की संस्कृति को बदलने के उद्देश्य से देशभर में फॉरेंसिक मोबाइल वैन शुरू की गयी हैं। उन्होंने एनएफएसयू के संस्थागत स्तंभों के रूप में शिक्षण, अनुसंधान एवं विकास, प्रशिक्षण, परामर्श, जांच, सहयोग और प्लेसमेंट का उल्लेख किया। एनएफएसयू के कैंपस निदेशक प्रो. एस. ओ. जुनारे ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भारत फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी है।
उन्होंने कहा, "फॉरेंसिक विज्ञान रॉकेट साइंस नहीं, बल्कि एप्लाइड साइंस है। हम अपराध और आतंकवाद से जुड़े अनेक मामलों की जांच करते हैं और विशेषज्ञों को प्रशिक्षण तथा शिक्षा भी प्रदान करते हैं।"प्रोफेसर जुनारे ने संकेत दिया कि जम्मू-कश्मीर के किसी एक जिले में एनएफएसयू का कैंपस स्थापित करने पर भी विचार किया जा रहा है।
विश्वविद्यालय की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि एनएफएसयू में जांच प्रक्रिया वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ की जाती है, जिसमें किसी प्रकार की छेड़छाड़ की गुंजाइश नहीं रहती और साक्ष्यों का संरक्षण इस तरह किया जाता है कि वे न्यायालय में स्वीकार्य हों। जांच के दौरान कई अनिवार्य प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन किया जाता है।
उन्होंने कहा कि हवाई दुर्घटनाओं सहित कई बड़े हमलों और त्रासद घटनाओं की जांच एनएफएसयू के विशेषज्ञों द्वारा की गई है। अधिकांश मामलों में मोबाइल क्रैकिंग, साइबर जांच और हाई-टेक मामलों को पेशेवर तरीके से अंजाम दिया जाता है, ताकि परिणामोन्मुखी निष्कर्ष सामने आ सकें।
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