बैतूल , मार्च 13 -- जल संरक्षण को लेकर चलाए जा रहे जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने कहा कि जल की प्रत्येक बूंद की रक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी है और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल स्रोतों को बचाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है।

उन्होंने कहा कि अपने आसपास के जल निकायों को प्रदूषण मुक्त रखना और वर्षा जल के संचय के प्रभावी उपाय अपनाना समय की मांग है। जीवनदायी जल के प्राकृतिक स्रोत लगातार सिमटते जा रहे हैं, ऐसे में इन्हें संरक्षित करने और बढ़ाने के लिए समाज के हर वर्ग को आगे आना होगा।

यह जागरूकता कार्यक्रम जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत विभिन्न जल संरचनाओं जैसे तालाब, डेम और छोटी नदियों के किनारे आयोजित किया जा रहा है, ताकि लोगों को जल के महत्व और उसके संरक्षण के प्रति सीधे तौर पर जागरूक किया जा सके।

सारिका घारू ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और अनियोजित विकास के कारण कई प्राकृतिक जल स्रोत समाप्त होते जा रहे हैं। इसके साथ ही बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से भी जल स्रोतों की स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते जल संरक्षण के ठोस प्रयास नहीं किए गए तो आने वाले समय में जल संकट और अधिक गंभीर रूप ले सकता है।

उन्होंने कहा कि जल स्रोतों को स्वच्छ बनाए रखना केवल शासन या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भी समान भागीदारी आवश्यक है। समाज के सभी लोगों को अपने स्तर पर जल संरक्षण के उपाय अपनाने चाहिए, जैसे वर्षा जल संचयन, जल का सीमित और समझदारी से उपयोग तथा जल स्रोतों के आसपास स्वच्छता बनाए रखना।

सारिका ने विशेष रूप से बच्चों और युवाओं में जल संरक्षण के संस्कार विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि बचपन से ही बच्चों को जल के महत्व और उसके संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाए तो भविष्य में समाज में जल के प्रति जिम्मेदार दृष्टिकोण विकसित होगा।

उन्होंने कहा कि जल प्रत्येक व्यक्ति के जीवन से जुड़ा विषय है, इसलिए इसे बचाने के लिए इस अभियान में सभी की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों को जल के महत्व की जानकारी दी गई और जल संरक्षण के लिए सामूहिक रूप से शपथ भी दिलाई गई।

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