भोपाल , मार्च 20 -- मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आनंद एक ऐसी सुखानुभूति है, जो धन से वस्तुएं खरीदकर नहीं, बल्कि अंतस में जागे मानवीय भावों की तृप्ति से प्राप्त होती है।

मुख्यमंत्री आज अंतर्राष्ट्रीय खुशहाली दिवस के अवसर पर आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में राज्य आनंद संस्थान द्वारा आयोजित "आनंद के आयाम" राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मनुष्य प्रायः भौतिक सुख-सुविधाओं में ही आनंद खोजता है, जबकि वास्तविक सुख और शांति मन के भावों की संतुष्टि में निहित है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की मूल भावना दूसरों के सुख में भी अपने आनंद को तलाशने की है। सनातन परंपरा में "वसुधैव कुटुम्बकम" की भावना के माध्यम से परिवार और समाज को एक सूत्र में बांधने का प्रयास किया गया है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में 14 से 28 जनवरी तक आयोजित आनंदोत्सव के विजेताओं को पुरस्कार स्वरूप नकद राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी प्रतियोगिता में विजेताओं को क्रमशः 25 हजार, 15 हजार और 10 हजार रुपये के पुरस्कार दिए गए।

उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी संतुलित रहकर आनंद की अनुभूति संभव है। उन्होंने सिंहस्थ जैसे आयोजनों में संतों की साधना का उदाहरण देते हुए कहा कि आध्यात्मिक मार्ग से ही सच्चे आनंद की प्राप्ति होती है।

इस अवसर पर हरिद्वार से आए महर्षि मधुसूदन जी महाराज सहित विभिन्न वक्ताओं ने भी आनंद और वेदांत दर्शन पर विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में आनंद विभाग के प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह सहित अनेक अधिकारी और गणमान्यजन उपस्थित थे।

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