बैतूल , मार्च 8 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के बीजादेही क्षेत्र की आदिवासी महिलाओं ने आत्मनिर्भरता और सामूहिक शक्ति का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन गया है। करीब 200 महिलाओं के स्व सहायता समूह से शुरू हुई पहल आज एक संगठित कंपनी का रूप ले चुकी है, जिसका सालाना टर्नओवर लगभग 12 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है और इसके उत्पाद पांच देशों में निर्यात किए जा रहे हैं।
महिला दिवस के अवसर पर यह कहानी बताती है कि सीमित संसाधनों और पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर महिलाएं किस तरह नवाचार और संगठन की ताकत से आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल कर सकती हैं। बीजादेही क्षेत्र की महिलाओं ने श्रीअन्न यानी मोटे अनाज को आधार बनाकर 'सतपुड़ांचल फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी' की स्थापना की और आज यह कंपनी ग्रामीण विकास का मॉडल बन चुकी है।
यह पहल कोविड-19 महामारी के कठिन दौर में शुरू हुई। 7 मई 2020 को नाबार्ड के सहयोग से महिला स्व सहायता समूहों ने मिलकर इस कंपनी की स्थापना की। शुरुआत में महिलाओं ने बीजादेही क्षेत्र के 28 गांवों में किसानों को श्रीअन्न की खेती के लिए प्रेरित किया। उस समय किसान पारंपरिक और कम गुणवत्ता वाले बीजों से खेती कर रहे थे, जिससे उत्पादन कम होता था।
महिलाओं ने इस स्थिति को बदलने का संकल्प लिया। समूह ने हैदराबाद से कोदो, कुटकी, सावा और रागी के उच्च गुणवत्ता वाले बीज मंगवाए और किसानों को पांच-पांच किलो बीज निशुल्क वितरित किए। इसके बदले किसानों से फसल के बाद 7.5 किलो बीज वापस लिया जाता था, ताकि अन्य किसानों को भी बीज उपलब्ध कराए जा सकें। इस पहल से खेती की गुणवत्ता में सुधार हुआ और उत्पादन बढ़कर प्रति एकड़ लगभग तीन क्विंटल तक पहुंच गया।
कंपनी की संचालिका यशोदा कासदे के अनुसार श्रीअन्न आधारित खेती और प्रसंस्करण से महिलाओं को न केवल आय का स्रोत मिला बल्कि गांवों में रोजगार के अवसर भी बढ़े। वर्तमान में इस पहल से 850 परिवार सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। बीजादेही क्षेत्र में करीब 1200 एकड़ भूमि पर कोदो, कुटकी, सावा और रागी की खेती की जा रही है, जिससे सालाना लगभग 200 टन उत्पादन हो रहा है।
कंपनी ने अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2024 में भारतीय स्टेट बैंक से 3.5 करोड़ रुपये का ऋण लेकर बीजादेही क्षेत्र में एक आधुनिक प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की। इस यूनिट में लगभग 20 महिलाएं काम कर रही हैं और यहां श्रीअन्न से विभिन्न प्रकार के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।
इन उत्पादों में कुकीज़, नूडल्स, पास्ता, इडली-डोसा मिक्स, उपमा मिक्स, खिचड़ी मिक्स, मल्टीग्रेन आटा, चिक्की और पापड़ जैसे खाद्य पदार्थ शामिल हैं। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण इन उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
कंपनी के उत्पाद अब अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच चुके हैं। वर्तमान में इन्हें अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और थाईलैंड जैसे देशों में निर्यात किया जा रहा है। इससे न केवल कंपनी की पहचान बढ़ी है बल्कि क्षेत्र की महिलाओं की मेहनत को वैश्विक मंच भी मिला है।
महिलाओं की इस पहल में जिला प्रशासन भी सहयोग कर रहा है। जिला पंचायत की स्व सहायता समूह स्टार्टअप योजना के तहत बीजादेही में एक वेयरहाउस का निर्माण कराया गया है, जहां श्रीअन्न का सुरक्षित भंडारण किया जा सकेगा। यहां कोदो, कुटकी, सावा और रागी की पैकेजिंग और ग्रेडिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
जिला पंचायत बैतूल के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अक्षत जैन ने बताया कि बीजादेही की महिलाओं द्वारा स्थापित सतपुड़ांचल फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि कंपनी का सालाना टर्नओवर करीब 12 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है और इससे बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाओं को रोजगार मिल रहा है।
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