आणंद , दिसंबर 15 -- गुजरात में आणंद जिले के वल्लभ विद्यानगर स्थित सरदार पटेल विश्वविद्यालय का 68वां दीक्षांत समारोह सोमवार को राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति आचार्य देवव्रत की उपस्थिति में आयोजित किया गया।

श्री देवव्रत ने इस अवसर पर नव-दीक्षांत प्राप्त विद्यार्थियों से अपने ज्ञान का उपयोग विश्व के कल्याण और भलाई के लिए करने का आह्वान किया और कहा कि जो विद्या अज्ञान, अभाव और अन्याय से मुक्ति दिलाए, वही सच्ची विद्या है। उन्होंने शुद्ध और पवित्र भाव के साथ सामाजिक परंपराओं के अनुरूप समाज में ज्ञान का प्रकाश फैलाने का संदेश दिया। इस अवसर पर विभिन्न संकायों के 16,963 विद्यार्थियों को स्नातक एवं स्नातकोत्तर की डिग्रियां प्रदान की गईं तथा 75 मेधावी विद्यार्थियों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए 103 स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।

राज्यपाल के करकमलों से डिग्रीधारकों को डिजी-लॉकर के माध्यम से ऑनलाइन डिग्री-प्रमाणपत्र भी उपलब्ध कराए गए। साथ ही, 22 भारतीय और 30 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में तैयार की गई 'सरदार यूनिटी क्विज़' का डिजिटल लोकार्पण किया गया।

दीक्षांत समारोह में स्वाध्याय आंदोलन की प्रेरक शक्ति एवं वैश्विक नेतृत्व प्रदान करने वाली पूज्य दीदीजी ( जयश्री उर्फ धनश्री आठवले तलवलकर) को उनके अद्वितीय सामाजिक, शैक्षणिक और आध्यात्मिक योगदान के लिए तथा विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र और अनुपम मिशन के संस्थापक जसुभाई शंकरभाई पटेल (गुरुहरि संतभगवंत पूज्य साहेबजी) को उनके विशिष्ट आध्यात्मिक और सामाजिक योगदान के लिए 'डॉक्टर ऑफ लेटर्स' (डी.एलआईटीटी.) की मानद उपाधि से राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत द्वारा सम्मानित किया गया।

श्री देवव्रत ने कहा कि हमारी ऋषि एवं गुरुकुल परंपरा में मानवीय जीवन मूल्यों, संस्कारों, मानवता और आध्यात्मिकता की शिक्षा दी जाती रही है। उन्होंने आधुनिक युग में ऐसे शिक्षा तंत्र की आवश्यकता पर बल दिया जो मानव को मानवतावादी, परोपकारी, राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार बनाए तथा सत्य, ईमानदारी, प्रेम, करुणा और दया जैसे मूल्यों के साथ मन, कर्म और आत्मा की पवित्रता को सुदृढ़ करे।

उन्होंने कहा कि नयी शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से देश की भावी पीढ़ी का भविष्य संवारने का कार्य हो रहा है। औद्योगिकीकरण, आधारभूत संरचना और नई तकनीकों के उपयोग से देश में व्यापक परिवर्तन आया है। उन्होंने सभी डिग्रीधारकों को उज्ज्वल भविष्य और ऊंचाइयां हासिल करने की शुभकामनाएं दीं तथा देश की एकता और अखंडता के शिल्पी सरदार पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित की।

दीक्षांत सम्बोधन में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. मिनेश शाह ने कहा कि आज विश्व अनेक चुनौतियों के बीच भी नवाचार के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से विश्वविद्यालय में अर्जित ज्ञान का उपयोग समाज, राष्ट्र और समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान के लिए करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की स्थापना की गई थी, जिससे देश के आठ करोड़ ग्रामीण किसान जुड़े हुए हैं। भारत आज विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है और प्रतिदिन लगभग 250 करोड़ रुपये पशुपालकों को भुगतान किए जाते हैं।

अमूल के सहकारी मॉडल की तर्ज पर अब दूध एवं दुग्ध उत्पादों के साथ-साथ फल, सब्जी और अन्य कृषि उत्पादों की बिक्री के लिए भी अमूल मॉडल लागू किया जा रहा है, जिससे किसानों को लाभ होगा। केंद्रीय सहकारिता विभाग द्वारा देश के दो लाख गांवों में बहुउद्देशीय सहकारी समितियां गठित की जाएंगी, जिनमें से 75 हजार गांवों में ऐसी समितियों के गठन की जिम्मेदारी राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड को सौंपी गई है। अगले पांच वर्षों में ये सभी गांव सहकारिता से जुड़ेंगे।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित