जोधपुर , दिसंबर 30 -- केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व की सराहना करते हुए मंगलवार को कहा कि आज दुनिया के किसी भी मंच पर भारत की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।
श्री शेखावत आज यहां अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद जोधपुर प्रांत के पश्चिमी राजस्थान उद्योग हस्तशिल्प उत्सव-2026 को संबोधित कर रहे थे। सैन्य शक्ति पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा , "वर्ष 1947 से लेकर कारगिल युद्ध तक दुश्मनों ने भारत की शांति को कमजोरी समझने की भूल की लेकिन अब 'नया भारत' है। सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक के माध्यम से भारत के नेतृत्व ने पूरे विश्व को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि भारत की भूमि के खिलाफ रचे गए किसी भी षड़यंत्र को अब स्वीकार नहीं किया जाएगा। अब भारत 'घर में घुसकर' मारता है।"उन्होंने भारत की सैन्य शक्ति, ऐतिहासिक गौरव और विकसित भारत-2047 की चर्चा करते हुए सवाल उठाया कि द्वितीय विश्व युद्ध के समय में दुनिया में अंग्रेजों के साथ जो मित्र देश खड़े थे, उनकी सेनाओं ने जितनी गोलियांदागी, उसकी 80 प्रतिशत मैन्युफैक्चरिंग ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड द्वारा हिंदुस्तान में होती थी। क्या कारण थे कि 55 साल तक भारत में वो सारी व्यवस्थाएं बंद हो गईं और हम 100 प्रतिशत आयात करने वाले देश बन गए।
उन्होंने कहा कि जो देश रॉकेट, मिसाइल एवं ब्रह्मोस बना सकता था, वो गोली नहीं बना सकता था। कितना दुर्भाग्यपूर्ण था लेकिन आज व्यवस्था बदली है और समय परिवर्तित हुआ है। आज भारत ने तय किया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम इस संकल्प के साथ में काम कर रहे हैं। अब केवल एक नेगेटिव लिस्ट बची है कि केवल इतनी चीजें हैं, जिसको हम इंपोर्ट करेंगे। बाकी सारी चीजें हम भारत में बना रहे हैं।
उन्होंने कहा कि तेजस से लेकर ब्रह्मोस, एंटी मिसाइल, जितनी भी हमारी टेक्नोलॉजी है, आज पूरी दुनिया लाइन लगाकर हमारे पीछे खड़े होकर खरीदने के लिए अनुग्रह करती दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि आज रूस-यूक्रेन के बीच तीन साल से युद्ध चल रहा है। उस युद्ध के बाद में यह स्पष्ट संदेश पूरी दुनिया के सामने कि आज के इस तकनीकी के युग में केवल लड़ाई सीमाओं पर नहीं होगी। सैनिक सामने बंदूक लेकर नहीं लड़ेंगे। अभी ईरान-इजराइल के बीच में तनाव हुआ। दोनों देशों की भौगोलिक सीमाएं मिलती नहीं हैं। कहीं एक-दूसरे के सामने सैनिक नहीं आया। एक भी गोली नहीं चलाई गई लेकिन तकनीकी के आधार पर युद्ध हो रहा था। उन्होंने कहा कि आज के समय में तकनीकी के रूप में दृष्टिकोण से हमको अपने आप को समृद्ध करना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि जो भारत कभी रक्षा उपकरणों का सबसे बड़ा आयातक था, आज वह शीर्ष 10 निर्यातक देशों में शामिल है। ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड के कायाकल्प और तेजस, ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों के निर्माण ने भारत को आत्मनिर्भर बनाया है। श्री शेखावत ने कहा कि भविष्य के युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ड्रोन्स और तकनीक के आधार पर होंगे। उन्होंने आह्वान किया कि आज केवल सैनिक ही नहीं, बल्कि कंप्यूटर और तकनीक पर काम करने वाले हर युवा और नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह राष्ट्र का सजग प्रहरी बने।
श्री शेखावत ने भारत की पिछले चार वर्षों से दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बताते हुए कहा कि 2 से 4 ट्रिलियन तक के सफर में ही देश की सड़कें, वंदे भारत ट्रेनें, ब्रॉडबैंड, हर घर बिजली, गैस चूल्हा और करदाताओं के लिए 12.5 लाख तक की टैक्स छूट जैसे क्रांतिकारी बदलाव आए हैं।
उन्होंने कहा कि हमें यह पढ़ाया गया कि हमारा इतिहास पराजय का रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि राजस्थान और पश्चिमी भारत की यह पवित्र धरती हजारों वर्षों से आक्रांताओं को चुनौती देने वाले बलिदानियों की रही है। उन्होंने प्रसिद्ध राजस्थानी लोरी का उल्लेख किया, "इला न देणी आपणी, हालरिया हुलराय...", जो सिखाती है कि मातृभूमि की रक्षा के लिए बलिदान होना जीने से श्रेष्ठ है। हमारी गौरवशाली सेना का इतिहास केवल युद्धों की गाथा नहीं है, हमारे गौरवशाली सैनिकों का इतिहास कर्तव्य, चरित्र और संस्कारों की गाथा है। जो संस्कार उनको पालने में सिखाए जाते थे, उन संस्कारों को कर्मभूमि में जाकर के भी उन संस्कारों का पालन करने और उन संस्कारों को जीने की गाथा हमारे सैनिकों का इतिहास है।
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