नयी दिल्ली , जनवरी 10 -- भारतीय एवं विश्व इतिहास में 11 जनवरी की महत्वपूर्ण घटनाएं निम्न प्रकार है।

1569 : इंग्लैण्ड में पहली लाटरी का शुभारम्भ हुआ।

1613 : मुगल बादशाह जहांगीर ने ईस्ट इंडिया कंपनी को सूरत में फैक्टरी लगाने की इजाजत दी।

1922: डायबिटीज के मरीजों को पहली बार इंसुलिन दी गई।

1942: द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान ने कुआलालंपुर पर अधिकार किया।

1954: बाल मजदूरी के खिलाफ आवाज उठाने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी का जन्म।

1955: भारत के अख़बारी काग़ज़ का उत्पादन प्रारम्भ हुआ।

1962: पेरू के उत्तरी-पश्चिमी पहाड़ी क्षेत्र में पत्थरों और बर्फ़ की बड़ी-बड़ी चट्टानों के सरकने से कई गांव और शहर बर्फ़ और चट्टानों की तह के नीचे दब गए जिसमें कम से कम दो हज़ार लोगों की मौत हो गई थी।

1966: भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का ताशकंद में निधन। वह वहां पाकिस्तान के साथ शिखर बैठक में हिस्सा लेने गए थे।

1972 : बांग्लादेश को पूर्वी जर्मनी ने मान्यता प्रदान की।

1973: भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी राहुल द्रविड़ का जन्म।

1990: लिथुआनिया में सोवियत संघ से आजादी की मांग के लिए बड़ी रैलियां हुईं।

1998: अल्जीरिया की सरकार ने दो गांवों पर हुए हमलों के लिए जिसमें 100 लोगों की हत्या कर दी गई थी, इस्लामी चरमपंथियों को ज़िम्मेदार ठहराया।

2001 : भारत और इंडोनिशया के बीच पहली बार रक्षा समझौता।

2002: गुआंतानामो बे में पहले कैदियों को लाया गया।

2002: पेट्रोल व डीजल के दामों में कमी। ट्राई ने बी.एस.एन.एल. को एस.टी.डी. दरों में कमी की मंजूरी प्रदान की।

2004: अहमदाबाद में हुए बलात्कार कांड का आरोपी दिल्ली के नर्सिंग होम से गिरफ़्तार।

2008: कांग्रेस की नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने दूसरे राज्य पुनर्गठन आयोग के गठन की रूपरेखा तैयार की।

2009: अचंता शरत कमल ने 70वीं सीनियर राष्ट्रीय टेबल टेनिस चैम्पियनशिप में पुरुष एकल वर्ग का ख़िताब जीता।

2010: भारत ने उड़ीसा के बालासोर में हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल अस्त्र के दो सफल परीक्षण किए। इस मिसाइल को भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने विकसित किया है।

2018: हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार दूधनाथ सिंह का निधन।

2021: विरासत संरक्षण समिति ने भारत के नए संसद भवन के निर्माण को मंजूरी दी।

2021: पोप फ्रांसिस ने गिरजाघर के नियमों में बदलाव कर महिलाओं को प्रार्थना के दौरान गोस्पेल पढ़ने सहित अन्य कार्य करने की अनुमति दी। हालांकि वे अभी भी पादरी नहीं बन सकतीं।

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