जयपुर , अप्रैल 10 -- राजस्थान की राजधानी जयपुर में तीन दिवसीय इंटरनेशनल जेम एंड ज्वैलरी शो (आईजीजेएस) जयपुर-2026 का आयोजन किया गया जिसमें बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच 230 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय खरीदार शामिल हुए।
द जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्टस प्रमोशन काउंसिल (जीजेईपीसी) द्वारा नौ से ग्यारह अप्रैल तक इसका आयोजन किया जा रहा है जो यह प्रदर्शनी भारतीय निर्माताओं और वैश्विक खरीदारों को एक ही मंच पर जोड़ने का कार्य कर रही है।
जीजेईपीसी के क्षेत्रीय अध्यक्ष (राजस्थान) योगेंद्र गर्ग ने शुक्रवार को मीडिया को बताया किआईजीजेएस को एक अत्यंत क्यूरेटेड और बिज़नेस-केंद्रित प्लेटफॉर्म के रूप में पहचाना जाता है जो वैश्विक रत्न एवं आभूषण व्यापार में भारत की स्थिति को एक प्रमुख सोर्सिंग डेस्टिनेशन के रूप में मजबूत करता है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष आईजीजेएस जयपुर में 85 कंपनियां 110 बूथ के माध्यम से अपनी भागीदारी दर्ज करा रही हैं। साथ ही 30 देशों से आए 230 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदार इस आयोजन में शामिल हो रहे हैं। इन देशों में अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, यूरोप, लैटिन अमेरिका, ओशिनिया, मिडिल ईस्ट एवं नॉर्थ अफ्रीका, रूस और सीआईएस क्षेत्र शामिल हैं।
यह आयोजन वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बदलते परिदृश्य के बीच भारत के जेम्स और ज्वेलरी सेक्टर के लिए नए व्यापारिक अवसरों को सृजित करने और निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।
श्री गर्ग ने कहा कि जयपुर रत्न और आभूषण उद्योग के लिए एक अद्वितीय और एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करता है । स्रोत और विनिर्माण से लेकर प्रमाणन और व्यापार तक सब कुछ निकटता में ही उपलब्ध है। आईजीजेएस जयपुर इसी मजबूती को दर्शाता है और वैश्विक खरीदारों को भारत की क्षमताओं से गहराई से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है।
प्रदर्शनी के उद्घाटन के मौके पर सीमा शुल्क निवारक विभाग नई दिल्ली के मुख्य आयुक्त संजय गुप्ता ने कहा कि उन्हें यह देखकर खुशी हो रही है कि जीजेईपीसी वैश्विक मंच पर ब्रांड इंडिया को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आईजीजेएस जैसे मंच न केवल भारत की विनिर्माण क्षमताओं की गहराई को प्रदर्शित करते हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के बीच विश्वास भी बढ़ाते हैं।
जयपुर के सीमा शुल्क आयुक्त आर के चंदन ने कहा कि सीमा शुल्क विभाग केवल नियामक ही नहीं है, बल्कि व्यापार को सुगम बनाने वाला भी है। हमारा मुख्य उद्देश्य व्यापार करने में सुगमता लाना और उद्योग के विकास में सहयोग करना है। हम आईजीजेएस के आयोजन में जीजेईपीसी के प्रयासों की सराहना करते हैं, जो वैश्विक खरीदारों और भारतीय निर्माताओं को एक सशक्त मंच पर एकजुट करता है।
ब्रिटेन में हाउस ऑफ बेनी के सीईओ और मालिक साइमन बेनी ने कहा "भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत शून्य टैरिफ के साथ उद्योग को एक साथ लाना दोनों पक्षों के लिए स्पष्ट लाभ पैदा करता है। यह एक प्रमुख लागत बाधा को दूर करता है और निर्माताओं, कटर्स और पॉलिशर्स की व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करता है। यहां जो बात सबसे अलग दिखती है, वह है भारतीय शिल्प कौशल का असाधारण स्तर, विशेष रूप से सेटिंग में सटीकता, फिनिशिंग की गुणवत्ता और एनामेल वर्क का उच्च मानक।
उन्होंने कहा कि बारीकी से देखने पर भी, हर छोटी से छोटी बात पर पूरा ध्यान दिया गया है। कुल मिलाकर, यह बेहद प्रभावशाली है और आभूषणों के द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि का एक मजबूत संकेत है।
दक्षिण अफ्रीका की इको चिक ज्वैलरी की एस्मेरी डू प्लोय ने कहा "भारत उम्मीद से कहीं अधिक अवसर प्रदान करता है।
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