शिमला , दिसंबर 18 -- शिमला स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (आईजीएमसी) ने स्पष्टीकरण जारी करके हाल की उन मीडिया खबरोंं का खंडन किया है, जिसमें अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग की डेक्सा स्कैन मशीन के काम न करने का दावा किया गया था।

अस्पताल प्रशासन ने ऐसी रिपोर्ट को "तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक," बताते हुए दावा किया है कि मशीन पूरी तरह से चालू है और ठीक से काम कर रही है। आईजीएमसी के चिकित्सा अधीक्षक ने आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके कहा है कि इस अपुष्ट जानकारी की वजह से आम जनता और मरीजों के बीच अनावश्यक भ्रम पैदा हो गया है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान की छवि पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

अस्पताल ने यह कहकर अपनी स्थिति तथ्यात्मक रूप से स्पष्ट की कि डेक्सा मशीन कुशलतापूर्वक काम कर रही है। सबूत के तौर पर यह बताया गया कि 17 दिसंबर 2025 को रेडियोलॉजी विभाग ने सफलतापूर्वक आठ डेक्सा स्कैन किए। प्रशासन ने कहा कि ये तथ्य आधिकारिक दस्तावेजों और ड्यूटी रजिस्टरों में विधिवत दर्ज हैं और इनकी पुष्टि किसी भी समय की जा सकती है।

अस्पताल के अधिकारियों ने संबंधित विभाग या प्रशासन से बिना किसी उचित सत्यापन के गलत जानकारी प्रकाशित करने पर चिंता जाहिर की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी भ्रामक खबरों से न केवल आम जनता का विश्वास कम होता है, बल्कि उन मरीजों को भी बिना वजह चिंता होती है, जो विशिष्ट निदान सेवाओं के लिए आईजीएमसी पर निर्भर हैं।

डेक्सा स्कैन एक महत्वपूर्ण नैदानिक उपकरण है, जिससे हड्डियों में खनिज घनत्व का आकलन किया जाता है और ऑस्टेओपोरोसिस का पता लगाया जाता है। इन सेवाओं की उपलब्धता या कुशलता के बारे में किसी भी भ्रामक और गलत जानकारी का प्रतिकूल प्रभाव मरीजों पर पड़ता है और यह अनावश्यक असुविधा के हालात पैदा कर सकती है।

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