शिमला , दिसंबर 26 -- हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) के एक सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर की बर्खास्तगी को लेकर चल रहा विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुँच गया है। नयी दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) ने उक्त डॉक्टर पर हुए हमले को "क्रूर और चौंकाने वाला" बताते हुए इस घटना की कड़ी निंदा की है और उन्हें तत्काल बहाल करने की मांग की है।
शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक बयान में, आरडीए-एम्स ने बर्खास्त डॉक्टर राघव नरुला के प्रति एकजुटता व्यक्त की। गौरतलब है कि एक मरीज से हुई हाथापाई की प्रारंभिक जांच के बाद डॉ. नरुला की सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं।
एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर डाले गए इस घटना के वीडियो में बुरी तरह काट-छाँट की गयी है। इस भ्रामक वीडियो में जानबूझकर उस हिस्से को हटा दिया गया है जिसमें डॉक्टर कथित तौर पर खुद को हमले से बचा रहे थे। एसोसिएशन ने कहा कि इस गलत वीडियो ने रेजिडेंट डॉक्टर को हमलावर के रूप में दिखाया। इससे चिकित्सा के पेशे से जुड़े लोगों की छवि को बट्टा लगा है।
आरडीए-एम्स ने हमले में शामिल सभी व्यक्तियों के साथ-साथ भ्रामक सामग्री फैलाने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त और तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि डॉक्टर के खिलाफ किसी भी मामले की जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और तटस्थ तरीके से की जाए और निराधार पाए जाने पर उसे वापस लिया जाए।
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