हैदराबाद , दिसंबर 02 -- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) हैदराबाद के निदेशक डॉ. बी एस मूर्ति ने छात्रोंं से कहा है कि विकसित भारत के सपने को पूरा करने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी के संपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करना आवश्यक है।

डॉ. मूर्ति मंगलवार को आचार्य जगदीश चंद्र बोस की 167वीं जयंती समारोह के हिस्से के रूप में हैदराबाद के जीआईटीएएम विश्वविद्यालय में 'लोकप्रिय विज्ञान और प्रौद्योगिकी में नवाचार' विषय पर एक प्रेरक व्याख्यान दे रहे थे।

डॉ. मूर्ति ने जे सी बोस के व्यापक योगदानों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी प्रतिभा जीव विज्ञान, माइक्रोवेव और प्रारंभिक दूरसंचार तक फैली हुई थी। उन्होंने छात्रों से श्री बोस की अथक जिज्ञासा से प्रेरणा लेने का आग्रह किया और उन्हें याद दिलाया कि नवाचार की कोई सीमा नहीं होती है।

निदेशक ने वैज्ञानिक प्रगति को देश के विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण से जोड़ते हुए कहा कि हमने अक्सर प्रौद्योगिकी से वंचित किए जाने के बावजूद अनुसंधान, मिसाइल प्रौद्योगिकी और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी प्रगति की है। डॉ. मूर्ति ने आईआईटी हैदराबाद के छह-मॉड्यूल सेमेस्टर वाले नवाचार-संचालित पाठ्यक्रम की व्याख्या की। यह पाठ्यक्रम छात्रों को अपने अनुसार पाठ्यक्रम चुनने की अनुमति देता है। निदेशक ने टेक्नोलॉजी इनोवेशन पार्क (टीआपी) के बारे में भी बताया। यहाँ पूरे देश से छात्र मेंटरशिप, फंडिंग और अनुसंधान समर्थन प्राप्त कर सकते हैं।

डॉ. मूर्ति ने कहा, "आप वही हैं जो आप सोचते हैं कि आप हैं।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महत्वाकांक्षा संसाधनों को आकर्षित करती है। उन्होंने इस कार्यक्रम में बोल्ड हार्टेड एस्पिरेंट्स राइजिंग टू ट्रांसफॉर्म इंडिया (भारती) और एक इंटर-आईआईटी अंडरग्रेजुएट इनोवेशन मीट जैसी पहलों की भी घोषणा की।

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