हरिद्वार , जनवरी 16 -- उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की में आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं सहनशीलता विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यशाला में आपदा-पूर्व तैयारी, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों, तकनीकी नवाचार, अनुसंधान सहयोग तथा सामुदायिक सहभागिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन मंथन किया गया।
श्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति के कारण भूकंप, भूस्खलन, अतिवृष्टि, बादल फटना, हिमस्खलन एवं वनाग्नि जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बना रहता है, जिन्हें वैज्ञानिक दृष्टिकोण, समयबद्ध तैयारी और सामूहिक प्रयासों से काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए 4पी मंत्र-"प्रिडक्ट, प्रिवेंट, प्रिपेयर, प्रोटेक्ट' के अनुरूप राज्य सरकार 10-सूत्रीय एजेंडे पर निरंतर कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित चेतावनी प्रणालियाँ, डिजिटल मॉनिटरिंग, ड्रोन सर्विलांस, जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट मॉनिटरिंग, ग्लेशियर रिसर्च सेंटर, रैपिड रिस्पॉन्स टीमें तथा फॉरेस्ट फायर अर्ली वार्निंग सिस्टम को सुदृढ़ किया जा रहा है। इसके लिए आपदा प्रबंधन विभाग, वन विभाग, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) एवं स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है।
आईआईटी रुड़की की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्थान भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली, भूस्खलन संवेदनशील क्षेत्रों की मैपिंग तथा बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणालियों के विकास में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। पर्यावरण संतुलन हेतु राज्य में पौधारोपण, जल संरक्षण, सौर ऊर्जा और स्प्रिंग रीजुविनेशन अथॉरिटी (सारा) के माध्यम से सतत प्रयास किए जा रहे हैं।
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