वाराणसी , दिसंबर 17 -- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बीएचयू), वाराणसी के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग द्वारा आयोजित फोरम फॉर इंफॉर्मेशन रिट्रीवल इवैल्यूएशन-2025 की 17वीं बैठक बुधवार को चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के रूप में देव एवं वर्धना गोस्वामी व्याख्यान कक्ष परिसर में विधिवत शुभारंभ हुआ। यह सम्मेलन 20 दिसंबर तक चलेगा।
उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि एवं मुख्य संरक्षक प्रो. अमित पात्रा, माननीय निदेशक, आईआईटी (बीएचयू) रहे। इस अवसर पर देश-विदेश से आए अनेक प्रतिष्ठित शिक्षाविद्, शोधकर्ता एवं उद्योग जगत के विशेषज्ञ उपस्थित रहे। अपने उद्घाटन संबोधन में प्रो. अमित पात्रा ने डिजिटल युग में सूचना पुनर्प्राप्ति के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डेटा आधारित इस युग में सूचना पुनर्प्राप्ति कच्ची जानकारी को सार्थक ज्ञान में परिवर्तित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। एफआईआरई जैसे मंच बहुभाषिकता, दुष्प्रचार तथा एआई आधारित सूचना प्रणालियों से जुड़ी नैतिक चुनौतियों पर शोध को आगे बढ़ाने में सहायक हैं। एफआईआरई -2025 की मेजबानी करना आईआईटी (बीएचयू) के लिए गर्व का विषय है, जो वैश्विक सहयोग और नवाचार को प्रोत्साहित करेगा।
फोरम फॉर इंफॉर्मेशन रिट्रीवल इवैल्यूएशन-2025 के आयोजन सचिव डॉ. सुकोमल पाल, एसोसिएट प्रोफेसर, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग, आईआईटी (बीएचयू) ने जानकारी दी कि इस सम्मेलन में दुनिया भर से अकादमिक एवं उद्योग क्षेत्र के लगभग 100 शोधकर्ता भाग ले रहे हैं। चार दिनों के दौरान 8 कीनोट व्याख्यान, 80 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुतियां, विचार-मंथन सत्र तथा पैनल चर्चाएं आयोजित की जाएंगी।
सम्मेलन की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कार्यक्रम के समन्वयक प्रो. प्रसेंजीत मजूमदार, डीएआईआईसीटी, गांधीनगर ने बताया कि एफआईआरई की शुरुआत वर्ष 2008 में दक्षिण एशिया के लिए टीआरईसी, सीएलईएफ और एनटीसीआईआर जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों के समकक्ष एक मूल्यांकन मंच के रूप में की गई थी। तब से एफआईआरई सूचना पुनर्प्राप्ति शोध समुदाय को सशक्त बनाने वाला एक प्रभावशाली मंच बन चुका है।
अन्य समन्वयक डॉ. देबासीस गांगुली, यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लासगो, यूके ने बताया कि एफआईआरई-2025 में ट्यूटोरियल्स, कीनोट व्याख्यान, साझा कार्य ट्रैक, सम्मेलन प्रस्तुतियां, पीएचडी क्लीनिक और उद्योग सत्र शामिल हैं। साझा कार्यों में क्रॉस-लिंगुअल गणितीय सूचना पुनर्प्राप्ति, सोशल मीडिया से कोड-मिक्स्ड डेटा, मीम्स में घृणास्पद एवं आपत्तिजनक सामग्री की पहचान, दुष्प्रचार पहचान तथा द्रविड़ भाषाओं में आपत्तिजनक भाषा की पहचान जैसे समसामयिक विषय शामिल हैं।
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