गांधीनगर , फरवरी 04 -- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी ) गांधीनगर और ताइपे इकनॉमिक एंड कल्चरल सेंटर (टीईसीसी ) के शिक्षा प्रभाग ने आईआईटी गांधीनगर परिसर में स्थित ताइवान एजुकेशन सेंटर के माध्यम से शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान को सुदृढ़ करने की पुन: अपनी प्रतिबद्धता जतायी है।

आईआईटी गांधीनगर के निदेशक प्रोफेसर रजत मूना ने बुधवार को बताया कि इस सहयोग के तहत टीईसीसी एक योग्य मैंडरिन भाषा प्रशिक्षक उपलब्ध करायगा, जबकि आईआईटी गांधीनगर कार्यालय एवं कक्षा सुविधाएँ प्रदान करेगा। यह साझेदारी शिक्षण पद्धतियों और शैक्षणिक कार्यक्रमों के विकास को भी समर्थन देगी, जिससे भारत और ताइवान के बीच गहन सहभागिता को बढ़ावा मिलेगा।

शैक्षणिक सहयोग के बढ़ते महत्व को रेखांकित करते हुए भारत में टीईसीसी के शिक्षा प्रभाग की निदेशक जिल लाई ने कहा कि शिक्षा दीर्घकालिक द्विपक्षीय सहभागिता का एक प्रमुख स्तंभ बनी हुई है। उन्होंने बताया कि ताइवान वर्तमान में कई भारतीय संस्थानों के साथ सहयोग कर रहा है और अल्पकालिक कार्यक्रमों, शैक्षणिक आदान-प्रदान तथा संयुक्त पहलों के माध्यम से इन साझेदारियों को और विस्तारित करने के लिए उत्सुक है।

सुश्री लाई ने कहा कि "शिक्षा ताइवान और भारत के बीच सतत सहयोग की नींव है। विश्वविद्यालयों, शिक्षकों और छात्रों के साथ सहयोग के माध्यम से हम संस्थागत संबंधों को सुदृढ़ करने के साथ-साथ सांस्कृतिक समझ और नवाचार-आधारित विकास को भी बढ़ावा देना चाहते हैं।"प्रोफेसर रजत मूना ने भारत और ताइवान के बीच सेमीकंडक्टर क्षेत्र को सहयोग का एक प्रमुख क्षेत्र बताते हुए कहा, "सेमीकंडक्टर निर्माण में ताइवान की वैश्विक नेतृत्व क्षमता शिक्षा, अनुसंधान और प्रतिभा विकास के क्षेत्र में सहयोग के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है।" उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय संस्थान छात्र आदान-प्रदान, संयुक्त कार्यक्रमों और अनुसंधान साझेदारियों के माध्यम से ताइवानी विश्वविद्यालयों के साथ लगातार जुड़ रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि सेमीकंडक्टर शिक्षा में संरचित अल्पकालिक शैक्षणिक आदान-प्रदान और केंद्रित कार्यक्रम धीरे-धीरे शिक्षा, उद्योग और सरकार को सम्मिलित करने वाले दीर्घकालिक सहयोग में परिवर्तित हो सकते हैं, जिससे इस रणनीतिक क्षेत्र में भारत-ताइवान संबंधों को मजबूती मिलेगी। उन्होंने सहयोग की प्राथमिकताओं की पहचान और चुनौतियों के समाधान के लिए प्रभावी नीतियों की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

चर्चा के दौरान भारत और ताइवान के बीच छात्र गतिशीलता को बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें भारतीय छात्रों के लिए ताइवानी संस्थानों में उच्च अध्ययन के अवसर शामिल हैं। सुचारु आदान-प्रदान सुनिश्चित करने के लिए शैक्षणिक कार्यक्रमों, क्रेडिट संरचनाओं और संस्थागत तैयारी के समन्वय पर बल दिया गया। विशेष रूप से प्रौद्योगिकी-आधारित क्षेत्रों में अल्पकालिक विनिमय कार्यक्रमों के विस्तार, संयुक्त अनुसंधान पहलों और संकाय सहभागिता को महत्वपूर्ण बताया गया।

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