आइज़ोल , फरवरी 08 -- गुवाहाटी उच्च न्यायालय की आइज़ोल पीठ ने आइज़ोल-सिलचर राष्ट्रीय राजमार्ग के महत्वपूर्ण हिस्सों की मरम्मत और रखरखाव का जिम्मा संभालने वाली निर्माण कंपनी को अप्रैल के अंत से पहले काम पूरा करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने मानसून का मौसम शुरू होने से पहले मिजोरम के इस महत्वपूर्ण मार्ग को बहाल करने की तात्कालिकता पर जोर दिया है।
न्यायमूर्ति मार्ली वानकुंग और न्यायमूर्ति मृदुल कुमार कलिता की खंडपीठ ने मिजोरम ट्रक ड्राइवर्स एसोसिएशन (एमटीडीए) की ओर से 2025 में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बुधवार को यह निर्देश जारी किया।
अदालत ने कार्य में लगे ठेकेदार मेसर्स जे इंफ्राटेक लिमिटेड को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि मरम्मत और रखरखाव की गतिविधियां अप्रैल 2026 तक पूरी हो जाएं, ताकि मानसून की बारिश से पहले काम खत्म हो सके, जो अक्सर इस क्षेत्र में सड़क की स्थिति को और खराब कर देती है।
कंपनी की ओर से पेश अधिवक्ता अनिल कुमार ने अदालत को सूचित किया कि मेसर्स जे इंफ्राटेक लिमिटेड ने साइटों पर 185 श्रमिकों को तैनात किया है, जिन्हें पांच उत्खनन (एक्सावेटर), पांच बैकहो लोडर, 13 टिपर, सात रोड रोलर और तीन पानी के टैंकरों सहित भारी मशीनरी का सहयोग मिल रहा है। हालांकि, पीठ वर्तमान तैनाती के स्तर से संतुष्ट नहीं थी और उसने ठेकेदार को अतिरिक्त जनशक्ति और मशीनरी जुटाकर अपने प्रयासों को तेज करने का निर्देश दिया।
अदालत ने कंपनी को 22 जनवरी, 2026 को हुई एक बैठक के अनुरूप, बढ़ी हुई तैनाती और काम की प्रगति का विवरण देते हुए एक अतिरिक्त हलफनामा प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया। पीठ ने स्पष्ट किया कि केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं होंगे। जमीन पर समयबद्ध प्रगति आवश्यक है।
ठेकेदार वर्तमान में तीन महत्वपूर्ण राजमार्ग खंडों बिल्खावलथ्लिर से कोलासिब, कावनपुई से खमरंग और बुइचाली से सैरांग की मरम्मत और रखरखाव के लिए जिम्मेदार है। ये खंड आइज़ोल-सिलचर कॉरिडोर का हिस्सा हैं, जिसे व्यापक रूप से मिजोरम की जीवन रेखा के रूप में जाना जाता है, क्योंकि यह राज्य में आवश्यक वस्तुओं के परिवहन के लिए यह प्राथमिक मार्ग के रूप में कार्य करता है। इस मामले में अगली सुनवाई 11 मार्च के लिए निर्धारित की गई है।
यह मामला एमटीडीए द्वारा दायर एक जनहित याचिका से शुरू हुआ है, जिसमें राजमार्ग के विभिन्न खंडों की गंभीर रूप से खराब स्थिति पर प्रकाश डाला गया था। याचिका में सड़क की खराब स्थिति के कारण वाहनों के बार-बार खराब होने, दुर्घटनाओं, लंबी देरी और परिवहन लागत में वृद्धि की ओर ध्यान आकर्षित किया गया था।
ट्रक यूनियनों और अन्य संगठनों द्वारा बार-बार किए गए विरोध प्रदर्शनों के बाद गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने इस जनहित याचिका को स्वीकार किया था। सड़क की बिगड़ती स्थिति के बावजूद लंबे समय तक कोई कार्रवाई न होने के कारण इन संगठनों ने कई मौकों पर राजमार्ग को अवरुद्ध किया था या ऐसा करने की धमकी दी थी।
पिछली कार्यवाही में, अदालत ने इस महत्वपूर्ण राजमार्ग को सुचारू बनाए रखने में विफलता पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी और आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही में व्यवधान के कारण आम जनता को होने वाली भारी कठिनाई का उल्लेख किया गया था। पीठ ने क्षतिग्रस्त रास्तों पर ट्रक चालकों द्वारा सामना किए जाने वाले खतरों के साथ-साथ बार-बार मरम्मत और देरी के कारण ट्रक मालिकों पर पड़ने वाले भारी वित्तीय बोझ पर भी ध्यान दिया।
नवंबर 2025 में हुई सुनवाई के दौरान, अदालत ने ठेकेदार को कड़ी चेतावनी दी थी कि यदि कंपनी अदालत के समक्ष उपस्थित होने या उसके निर्देशों का पालन करने में विफल रहती है, तो वह गिरफ्तारी वारंट जारी करने पर विचार करेगी। ताजा आदेश अदालत के इस कड़े रुख को दोहराता है कि जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए और राजमार्ग की बहाली में और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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