भीलवाड़ा , फरवरी 04 -- राजस्थान में भीलवाड़ा में नदी बचाओ आंदोलन के तहत आंदोलनकारियों पर दर्ज हुए मामलों के विरोध में बुधवार को फूलियाकलां में तनावपूर्ण स्थिति रही।

ग्रामीणों ने झूठे मामले दर्ज होने के विरोध में न केवल बाजार बंद रखे, बल्कि बड़ी संख्या में महिलाओं ने फूलियाकलां थाने के बाहर धरना देकर नारेबाजी की।

ग्रामीणों और खनन कंपनी के कर्मचारियों के बीच विवाद ने अब बड़ा रूप ले लिया है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस को रिपोर्ट सौंपी है। ग्रामीणों ने थाना अधिकारी राजेंद्र सिंह को की शिकायत में बताया कि खनन कंपनी के कर्मचारी महिलाओं के साथ अभद्रता करते हैं और नदी की ओर जाने पर जान से मारने की धमकी देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दो फरवरी को जब ग्रामीण अवैध खनन देखने गए, तो कर्मचारियों ने उन पर हथियारों से हमला किया और भागचन्द जाट सहित अन्य के साथ मारपीट की। साथ ही खुद ही अपने धर्म कांटे तोड़कर ग्रामीणों पर झूठा मामला दर्ज करवा दिया।

दूसरी ओर खनन कंपनी ने आरोप लगाया कि दो फरवरी को करीब 200 लोगों ने सणगारी गांव के पास स्थित खनन क्षेत्र में हमला किया। उन्होंने सोलर पैनल, कंप्यूटर, आईटी मशीनें और माइनिंग रिकॉर्ड लूट लिए और मशीनों में तोड़फोड़ की। कंपनी ने 30 नामजद और 40 अन्य के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

इस विवाद के बाद पुलिस ने दो ग्रामीणों को गिरफ्तार किया था, जिसके विरोध में बुधवार को ग्रामीणों ने थाने पर 'धावा' बोल दिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शाहपुरा पुलिस उपाधीक्षक ओमप्रकाश विश्नोई, तहसीलदार रामदेव धाकड़ और कई थानों (गुलाबपुरा, बनेड़ा, पंडेर, शाहपुरा, पारोली) का भारी जाब्ता मौके पर तैनात रहा।

अधिकारियों से ग्रामीणों की लम्बी बातचीत के बाद गिरफ्तार किए गए दोनों व्यक्तियों को पाबंद करके थाने से रिहा किया गया, तब जाकर ग्रामीण शांत हुए। हालांकि, क्षेत्र में अब भी खनन को लेकर तनाव बना हुआ है और निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।

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