भोपाल , मार्च 24 -- मध्यप्रदेश में शाला-पूर्व शिक्षा को सशक्त बनाने के उद्देश्य से प्रदेशभर के आंगनवाड़ी केन्द्रों में 'विद्यारंभ' उत्सव आयोजित किया गया, जिसमें लगभग 10 लाख बच्चों को आंगनवाड़ी से विद्यालय में प्रवेश के लिए 'विद्यारंभ प्रमाणपत्र' प्रदान किए गए।
महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने भोपाल के नेहरू नगर स्थित आंगनवाड़ी केन्द्र में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में बच्चों और उनके अभिभावकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आंगनवाड़ी केन्द्र बच्चों के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण प्रारंभिक पाठशाला हैं, जहां पोषण और शिक्षा दोनों का समग्र ध्यान रखा जाता है।
उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी केन्द्र मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा का समन्वित केन्द्र हैं, जहां गर्भावस्था से लेकर छह वर्ष तक बच्चों के समग्र विकास पर ध्यान दिया जाता है। प्रदेश में 'पोषण भी, पढ़ाई भी' कार्यक्रम के तहत बच्चों को खेल-आधारित प्रारंभिक शिक्षा दी जा रही है।
मंत्री ने बताया कि 3 से 6 वर्ष की आयु के दौरान बच्चों के शारीरिक, बौद्धिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जिससे वे आगे की स्कूली शिक्षा के लिए तैयार होते हैं। भारत सरकार के निर्देशानुसार अब आंगनवाड़ी में तीन वर्ष की शिक्षा पूर्ण करने वाले बच्चों को 'विद्यारंभ प्रमाणपत्र' प्रदान किया जा रहा है।
उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि उनके समर्पण के कारण हर वर्ष लाखों बच्चे गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त कर विद्यालय में प्रवेश के लिए तैयार हो रहे हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव जी वी रश्मि ने कहा कि यह प्रमाणपत्र बच्चों की शिक्षा यात्रा का पहला महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो आंगनवाड़ी की अनौपचारिक शिक्षा से विद्यालय की औपचारिक शिक्षा में सहज संक्रमण सुनिश्चित करता है।
उन्होंने माता-पिता की भूमिका को भी बच्चों के विकास में महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम में बच्चों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए तथा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं। अभिभावकों ने आंगनवाड़ी से बच्चों में आए सकारात्मक बदलावों को साझा किया।
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