जयपुर , जनवरी 29 -- राजस्थान की उपमुख्यमंत्री और महिला एवं बाल विकास मंत्री दिया कुमारी ने गुरुवार को विधानसभा में कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर स्थान एवं वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर पोषण वाटिकाएं विकसित की जायेगी। श्रीमती दिया कुमारी प्रश्नकाल में विधायक संदीप शर्मा के पूरक प्रश्नों का जवाब दे रही थी। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2020-21 एवं 2021-22 में पोषण अभियान के तहत नवाचार के रूप में प्रदेश में पोषण वाटिकाएं विकसित की गई थीं तथा वर्तमान में भी केंद्र सरकार के सहयोग से यह कार्य निरंतर जारी है।
उन्होंने कहा कि सक्षम आंगनबाड़ी केंद्रों एवं राज्य मद से विकसित किये जा रहे आदर्श आगनबाड़ी केंद्रों पर स्थान की उपलब्धता के अनुसार पोषण वाटिकाएं विकसित की जा रही है। वर्तमान में प्रदेश में 107 सक्षम आंगनबाड़ी केंद्रों एवं 242 आदर्श आगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण वाटिकाएँ विकसित की जा चुकी हैं। अन्य आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी स्थान एवं वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर पोषण वाटिकाएँ विकसित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के मानदेय में समय-समय पर वृद्धि की जाती रही है। इसके साथ ही केंद्र सरकार के स्तर पर भी मानदेय एवं अन्य मदों में देय राशि में वृद्धि के लिए राज्य द्वारा अनुरोध किया जाता है एवं राज्य की ओर से भिजवाए जाने वाले एनुअल प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन प्लान में भी आवश्यकतानुसार इस राशि में वृद्धि सम्बन्धी प्रस्ताव भिजवाए जाते है।
इससे पहले श्री शर्मा के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में श्रीमती दिया कुमारी ने कहा कि कोटा जिले में वर्तमान में 1312 आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित हैं, इनमें से 280 आंगनबाड़ी केन्द्र महिला एवं बाल विकास विभाग के भवनों में, 502 किराये के भवनों में एवं 530 अन्य राजकीय व निजी नि:शुल्क भवनों में संचालित हैं।जिलें में 727 आंगनबाड़ी केन्द्र एक कमरे में संचालित हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पोषण अभियान में नवाचार के तहत वित्त वर्ष-2020-21 में 7686 तथा वर्ष 2021-22 में 6465 आंगनबाडी केन्द्रों पर पोषण वाटिकायें विकसित की गई।
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