देहरादून , मई 06 -- विश्व अस्थमा दिवस के उपलक्ष्य में बुधवार को उत्तराखंड के देहरादून जनपद अंतर्गत ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के बाल रोग और आयुष विभाग के संयुक्त तत्वावधान में शैक्षिक और नैदानिक कार्यक्रमों की एक श्रृंखला आयोजित की गई जिसमें विशेषज्ञों ने बीमारी के कारण, सावधानियां और बचाव के उपाय बताए।
कार्यक्रम में संस्थान की निदेशक एवं सीईओ प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह ने अस्थमा रोग की रोग क्रिया विज्ञान, पर्यावरणीय नियंत्रण और अनुवर्ती कार्रवाई के महत्व पर व्याख्यान दिया। उन्होंने इस दौरान बीमारी से ग्रसित बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया। साथ ही उनसे बीमारी के कारण नियमित रूप से पेश आने वाली दिक्कतों और वह किन दवाओं का उपयोग कर रहे हैं, इससे संबंधित जानकारियां भी ली। उन्होंने बच्चों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे इनहेलर की जानकारी लेने के साथ साथ उन्हें अलग-अलग तरह के इनहेलर को किन- किन परिस्थितियों में उपयोग में लाना है, इससे जुड़ी तकनीक बताई व उन्हें इसका अभ्यास भी कराया।
इस अवसर पर डॉ. प्रशांत कुमार वर्मा ने प्रतिरक्षा उपायों, पूरक आहार और दैनिक जीवन में अपनाए जाने वाली जरूरी सावधानियां और जीवनशैली में जरूरी बदलावों की भूमिका पर बहुमूल्य जानकारी दी। उन्होंने इसे अस्थमा नियंत्रण के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम में बाल चिकित्सा फुफ्फुसीय विज्ञान (पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजी) और गहन चिकित्सा विभाग (इन्टनशिप केयर विभाग) से प्रो. लोकेश तिवारी, डॉ. व्यास राठौर, आयुष विभागाध्यक्ष डॉ. मोनिका पठानिया, डॉ. श्वेता मिश्रा, डॉ. मृणालिनी आदि ने भी बीमारी से संबंधित आवश्यक जानकारियां साझा कीं।
कॉलेज ऑफ नर्सिंग के विद्यार्थियों ने अस्थमा के निदान, बचाव व अन्य जरूरी सावधानियों पर जनजागरूकता के उद्देश्य से पोस्टर तैयार किए और सम्बन्धित जानकारियां दी।
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