नयी दिल्ली , दिसंबर 20 -- असम के होजाई में शनिवार सुबह सैरांग-नयी दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस की चपेट में आने से सात हाथियों की मौत के मामले में रेलवे ने स्पष्टीकरण दिया है कि हाथियों की आवाजाही के बारे में जानकारी मिलने पर लोको पायलटों को सतर्कता के साथ आगे बढ़ने और पटरियों पर हाथियों की मौजूदगी की स्थिति में रुकने के लिए तैयार रहने की सलाह दी जाती है और इस मामले में भी ऐसा किया गया था।

रेलवे का कहना है कि इसके अलावा अस्थायी गति प्रतिबंध लगाए जाते हैं जिन्हें संबंधित राज्यों के वन विभागों से प्राप्त जानकारी और सलाह के आधार पर समय-समय पर संशोधित किया जाता है।

गौरतलब है कि हाथियों के झुंड की आवाजाही के संबंध में लुमडिंग रेंज के रेंज वन अधिकारी के कार्यालय द्वारा दिये जाने के बावजूद दुर्घटना घटित होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

इस बीच पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के प्रवक्ता कपिंजल किशोर शर्मा ने कहा कि यह दुर्घटना पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के लुमडिंग डिवीजन के अंतर्गत जमुनामुख-कामपुर खंड पर देर रात 2:17 बजे हुई। उन्होंने बताया कि लुमडिंग रेंज वन अधिकारी द्वारा पहले जारी किया गया एक सावधानी आदेश एक अलग स्थान का संकेत देता प्रतीत होता है। लुमडिंग रेंज के वन अधिकारी जेकोलिन टेरोनपी ने 19 दिसंबर को लिखे एक पत्र में कहा था कि हाथियों का एक झुंड शाम करीब 5:08 बजे लमसाखांग (एलकेजी) और हबाईपुर (एचडब्ल्यूएक्स) के बीच रेलवे केएम पोस्ट 166/8-171/3 और 174/4-6 के पास देखा गया था।

पत्र में रेलवे अधिकारियों से निर्दिष्ट हिस्सों में जंगली हाथियों की संभावित आवाजाही के कारण सावधानी बरतने और ट्रेन की गति को प्रतिबंधित करने का अनुरोध किया गया था।

श्री शर्मा ने कहा कि यह घटना ऐसे स्थान पर हुई जो निर्दिष्ट हाथी गलियारा नहीं है। उन्होंने कहा, "हाथियों के झुंड को देखकर लोको पायलट ने आपातकालीन ब्रेक लगाए लेकिन हाथी ट्रेन से टकरा गए। कोई यात्री हताहत नहीं हुआ है या चोट नहीं आई है।"उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र गुवाहाटी से लगभग 126 किमी दूर है। संभागीय मुख्यालय के अधिकारियों के साथ दुर्घटना राहत ट्रेनें पहले से ही मौके पर मौजूद हैं। एनएफ के महाप्रबंधक सहित वरिष्ठ रेलवे अधिकारी, रेलवे और लुमडिंग के मंडल रेल प्रबंधक भी घटनास्थल पर पहुंचे।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित