बेंगलुरु , दिसंबर 27 -- कर्नाटक के मंत्री केएन राजन्ना ने शनिवार को जनता दल (एस)-भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि दोनों पार्टियों के बीच यह बहुचर्चित साझेदारी किसी वैचारिक या रणनीतिक प्रतिबद्धता के बजाय पूरी तरह से चुनावी सुविधा और स्वार्थ से प्रेरित है।
श्री राजन्ना ने कहा कि जद (एस) और भाजपा दोनों के नेताओं ने बार-बार अपनी समझ को शाश्वत और एक संयुक्त संघर्ष के रूप में पेश किया है, लेकिन स्थानीय निकाय चुनावों में उनका आचरण एक अलग कहानी कहता है। उन्होंने बताया कि जब भी गठबंधन चुनावी रूप से फायदेमंद होता है, तो उसे अपनाया जाता है, और जहां यह उनके हिसाब से फिट नहीं बैठता, वहां इसे चुपचाप छोड़ दिया जाता है।
इस दौरान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा के बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि जद (एस)-भाजपा गठबंधन लोकसभा और विधानसभा चुनावों तक सीमित था। उन्होंने ने कहा कि इस तरह के बदलते स्पष्टीकरण एक स्पष्ट और सुसंगत रुख की कमी को उजागर करते हैं। उन्होंने कहा, " वरिष्ठ नेताओं ने स्थायी गठबंधन की बात की थी और हमने उन पर विश्वास किया। अब कहानी बदलती रहती है।"टाउन पंचायत चुनावों के उदाहरण देते हुए श्री राजन्ना ने कहा कि जद (एस) ने कई जगहों पर भाजपा के साथ गठबंधन किए बिना स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ा। उन्होंने कहा कि यह दर्शाता है कि गठबंधन तभी काम करता है जब यह तात्कालिक राजनीतिक हितों को पूरा करता है।
श्री राजन्ना ने कहा कि कांग्रेस विपक्ष की आलोचना से हैरान नहीं है। सरकार पर हमला करना विपक्ष की भूमिका है। उन्होंने कहा कि लोग बारीकी से देख रहे हैं और पार्टियों का मूल्यांकन उनके स्थायित्व के दावों से नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर उनके कार्यों से करेंगे।
कांग्रेस नेता ने कहा कि इस तरह के चुनिंदा गठबंधन जनता के विश्वास को कमजोर करते हैं और जद (एस)-भाजपा का संबंध के अवसरवादी स्वभाव को उजागर करते हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित