अलाप्पुझा , फरवरी 20 -- 'वॉइसेस फॉर एशियन एलीफेंट्स' (वीएफएईएस) ने केरल के अल्लापुझा जिले के दो मंदिरों में आदमकद रोबोटिक हाथियों का अनावरण किया है। यह पहली बार है जब जिले के मंदिरों ने जीवित हाथियों की जगह रोबोटिक हाथियों के विकल्प को अपनाया हैयह पहला मौका है जब किसी गैर-लाभकारी संगठन ने केरल के एक ही जिले में एक ही दिन दो रोबोटिक हाथियों का अनावरण किया है। 'नीलमकुलंगरा विष्णुदासन' और 'ओंकारेश्वरम रामा सेनापति' नाम के इन रोबोटिक हाथियों का स्वागत पारंपरिक संगीत और अनुष्ठानों के साथ क्रमशः पनवल्ली नीलमकुलंगरा श्री नारायण विलासम श्री महा विष्णु क्षेत्रम मंदिर और ओंकारेश्वरम श्री राम सुब्रह्मण्य मंदिर में किया गया।
यह पहल केरल के उत्सवों में हाथियों से जुड़ी बढ़ती त्रासदियों के बीच की गई है। यह जीवित हाथियों के प्रदर्शन से जुड़े जोखिमों और कष्टों को समाप्त करता है तथा मंदिर उत्सवों से जुड़ी भव्यता और पवित्रता को भी बरकरार रखता है।
रिपोर्ट के अनुसार, एक मार्च 2025 से दो जनवरी 2026 के बीच, केवल दस महीनों में कम से कम 20 बंदी हाथियों की मृत्यु हुई यानी हर महीने औसतन दो मौतें। इस उत्सव ने हाथियों के कल्याण और सुरक्षा को लेकर सार्वजनिक चिंता बढ़ा दी है।
हाल की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक प्रसिद्ध हाथी 'थेचिक्कोट्टुकावु रामचंद्रन' से जुड़ी थी, जिसकी भगदड़ के कारण कई लोगों मौतें हुई थीं और कई लोग घायल भी हो गये थे। इसी महीने एक अन्य घटना में, एक हाथी के हमले में एक महावत की जान चली गई। वीएफएईएस की संस्थापक और प्रबंध निदेशक संगीता अय्यर ने कहा कि ये बार-बार होने वाली त्रासदियाँ सुधार की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।
सुश्री अय्यर ने जोर देकर कहा कि अपनी प्रजनन आयु के सर्वश्रेष्ठ वर्षों में हाथी कैद में मर रहे हैं, जबकि जंगल में वे झुंडों का नेतृत्व करते हैं। उन्होंने कहा, "सच्ची भक्ति में विचार और व्यवहार दोनों में अहिंसा होनी चाहिए।" उन्होंने कहा कि रोबोटिक हाथियों को प्रायोजित करना मंदिरों के लिए मानव जीवन और हाथियों की गरिमा दोनों की रक्षा करने का एक रास्ता है।
दस फीट ऊंचे और लगभग 500 किलोग्राम वजन वाले ये रोबोटिक हाथी फाइबर और रबर से बने हैं। इनमें आंखों, कान, सूंड और पूंछ की हलचल इलेक्ट्रॉनिक रूप से संचालित होती है।
ये अनुष्ठानों और जुलूसों के दौरान सुरक्षित रूप से चार लोगों को ले जा सकते हैं। 'फोर ही-आर्ट्स क्रिएशंस' द्वारा कलाकार प्रशांत प्रकाश के निर्देशन में डिजाइन किए गए हैं।
पनवल्ली नीलमकुलंगरा मंदिर की सलाहकार समिति के अध्यक्ष पी.आर. पुरुषन ने कहा कि मंदिर ने सुरक्षा और नैतिकता को प्राथमिकता देते हुए हाथियों और आतिशबाजी दोनों को बाहर करने का फैसला किया है। वहीं, ओंकारेश्वरम मंदिर के अध्यक्ष एन.आर. सुरेंद्रन ने कहा कि यह सहयोग करुणा से समझौता किए बिना पवित्र परंपराओं को बनाए रखने में सक्षम बनाता है।
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