अलवर , मार्च 01 -- होली के मौके पर वैसे तो देश के अलग-अलग राज्यों एवं शहरों में अलग-अलग परंपरा है, लेकिन राजस्थान के अलवर में एक सेठ सेठानी का स्वांग निकालने की परम्परा करीब डेढ़ सौ वर्षों से चली आ रही है।

होली के मौके पर अलवर शहर में सेठ सेठानी का स्वांग निकलता है। यह स्वांग शहर के बाजारों से होकर गुजरता है। इस स्वांग को नागोरी स्वांग कहा जाता है। इसमें सेठ सेठानी के रूप में कुछ लोग तैयार होकर शहर की सड़कों पर निकलते हैं। इस दौरान जमकर ठहाके लगते हैं और संवाद चलता है।

पहल सेवा संस्था की ओर से होली से एक दिन पूर्व परंपरागत स्वांग का भव्य आयोजन किया गया। यह स्वांग शहर के काशीराम चौराहे से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए कंपनी बाग तक निकाला गया। स्वांग में बड़ी संख्या में समाजजन, युवा और महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए, जिससे पूरे मार्ग पर उत्सव जैसा माहौल दिखाई दिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान के वन मंत्री संजय शर्मा रहे। उन्होंने स्वांग की परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं और हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखते हैं।

आयोजन के दौरान सेठ सेठानी की आकर्षक झांकियां निकाली गईं, जिन्हें देखने के लिए सड़क के दोनों ओर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए शंकर लाल सैनी ने बताया कि यह स्वांग हर वर्ष होली से एक दिन पहले निकाला जाता है और इसमें धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। पूरे आयोजन में अनुशासन और उत्साह देखने को मिला।

स्वांग के समापन पर कंपनी बाग में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां समाज के लोगों ने एक-दूसरे को होली की शुभकामनाएं दीं।

इतिहासकार हरिशंकर गोयल ने बताया कि होली के मौके पर स्वांग निकालने की परंपरा सैंकड़ों वर्ष पुरानी है। अलवर में डेढ़ सौ वर्षों से इस तरह के स्वांग निकाले जा रहे हैं। विलुप्त होती इस स्वांग की परंपरा को पहल सेवा संस्थान की तरफ से जीवित रखा गया है। इंटरनेट, 5जी एवं मोबाइल की दुनिया में लोग पूरी तरह से मोबाइल में डूबने के बाद भी इस स्वांग का लोग इंतजार करते हैं। समय के साथ स्वांग में हर वर्ष नए बदलाव भी किए जाते हैं। इसलिए लोगों में स्वांग के प्रति आकर्षण भी बढ़ता है।

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