सिलीगुड़ी , दिसंबर 16 -- उत्तरी बंगाल और पड़ोसी असम के कुछ हिस्सों में कामातापुर राज्य मांग परिषद (केएसडीसी) द्वारा बुलाए गए प्रस्तावित अनिश्चितकालीन 'रेल रोको' (रेल नाकाबंदी) विरोध प्रदर्शन को सुरक्षा बलों ने मंगलवार को एक संयुक्त कार्रवाई में नाकाम कर दिया। यह विरोध प्रदर्शन अलग कामातापुर राज्य, समुदाय के लिए अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा और संविधान की आठवीं अनुसूची में उनकी भाषा को मान्यता देने की मांग को लेकर किया जा रहा था।

केएसडीसी कार्यकर्ताओं ने, कामातापुर लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (केएलओ) और अन्य राजबंशी समूहों के कुछ अलग हुए गुटों के समर्थन से, उत्तरी बंगाल के कुछ हिस्सों, जिसमें मैनागुड़ी, कूचबिहार और कुछ अन्य स्टेशन और असम के धुबरी में पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) के तहत सुबह-सुबह पटरियों पर इकट्ठा होकर 100 घंटे का 'रेल रोको' प्रदर्शन का आह्वान किया था।

रेलवे पुलिस फोर्स, जनरल रिजर्व पुलिस (जीआरपी) और राज्य सशस्त्र पुलिस की संयुक्त इकाइयों की त्वरित कार्रवाई से ट्रेनों का संचालन सुनिश्चित हुआ। प्रदर्शनकारी पोस्टर, बैनर लेकर इकट्ठा हुए थे और उत्तरी बंगाल के राजबंशी समुदाय के जातीय लोगों के लिए अलग राज्य, अनुसूचित जनजाति का दर्जा और संविधान की 8वीं अनुसूची में उनकी स्थानीय भाषा को मान्यता देने की मांग को लेकर पटरियों पर नारे लगा रहे थे।

सूत्रों ने बताया कि मैनागुड़ी पुलिस स्टेशन, जीआरपी और आरपीएफ की एक संयुक्त टीम ने एक ऑपरेशन में प्रदर्शनकारियों को पटरियों से हटा दिया। पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्सों में पिछले आधी सदी से अलग राज्य का आंदोलन जारी है, और चुनाव , स्वतंत्रता दिवस तथा गणतंत्र दिवस जैसे अन्य राष्ट्रीय महत्वपूर्ण दिवसों के दौरान इसकी गति बढ़ जाती है।

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