ईटानगर , मई 06 -- बच्चों के कल्याण और पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी कामेंग जिले की जिला बाल संरक्षण इकाई (डीसीपीयू) ने अपने पहले गोद लेने के मामले को सफलतापूर्वक पूरा किया है।

यह मामला लगभग तीन साल पुराना है, जब जिले में एक लावारिस बच्चा मिला था, जिसका कोई अभिभावक या संरक्षक नहीं था। संबंधित अधिकारियों द्वारा काफी खोजबीन और प्रयासों के बावजूद किसी ने भी बच्चे पर अपना दावा पेश नहीं किया। इसके बाद डीसीपीयू ने कानूनी प्रावधानों के तहत बच्चे की सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित करने के लिए तुरंत हस्तक्षेप किया।

अधिकारियों के अनुसार, गोद लेने की यह पूरी प्रक्रिया दत्तक ग्रहण नियमों और बाल संरक्षण कानूनों का कड़ाई से पालन करते हुए पूरी की गयी है। इस दौरान बच्चे के सर्वोत्तम हितों को सर्वोपरि रखा गया। यह पूरी प्रक्रिया डीसीपीयू की उपायुक्त-सह-अध्यक्ष यशस्विनी बी. के मार्गदर्शन में संवेदनशीलता और पेशेवर तरीके से संपन्न हुई।

बच्चे को एक देखभाल करने वाले दत्तक परिवार में सफलतापूर्वक सौंपे जाने के साथ ही जिले ने बाल संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता हासिल की है।

अधिकारियों ने इसे केवल एक कानूनी प्रक्रिया का समापन नहीं, बल्कि बच्चे के जीवन में सुरक्षा, गरिमा और स्नेह से भरे एक नये अध्याय की शुरुआत बताया है।

यह सफलता बाल संरक्षण प्रणाली की प्रतिबद्धता को दर्शाती है और बेसहारा बच्चों को प्यार भरा घर प्रदान करने के लिए 'गोद लेने' के महत्व को रेखांकित करती है।

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