नयी दिल्ली , दिसंबर 23 -- कांग्रेस ने कहा है कि अरावली को लेकर केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने जो स्पष्टीकरण दिया है उससे कई और सवाल खड़े होते हैं तथा पूरे मुद्दे को गहरे संदेह में ले जाते हैं।
कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि अरावली मुद्दे पर पर्यावरण मंत्री का स्पष्टीकरण अस्पष्ट है और इसमें जो आंकड़े दिए गए हैं वह भ्रामक है और उससे कई सवाल और संदेह पैदा होते हैं।
उन्होंने कहा "केंद्रीय मंत्री के अनुसार अरावली के 1.44 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में से फिलहाल केवल 0.19 प्रतिशत हिस्सा ही खनन पट्टों के अंतर्गत है लेकिन यह भी लगभग 68,000 एकड़ है जो अपने आप में एक बहुत बड़ा क्षेत्र है। हालांकि 1.44 लाख वर्ग किलोमीटर का आंकड़ा भ्रामक है। इसमें चार राज्यों के 34 अरावली ज़िलों का पूरा भौगोलिक क्षेत्र शामिल कर लिया गया है। यह एक गलत आधार है, क्योंकि सही आधार तो इन ज़िलों के भीतर वास्तव में अरावली के अंतर्गत आने वाला भूभाग होना चाहिए। यदि अरावली के वास्तविक क्षेत्र को आधार माना जाए, तो 0.19 प्रतिशत का आंकड़ा बहुत कम आकलन साबित होगा।"श्री रमेश ने आरोप लगाया कि तीन चार राज्याें के 34 ज़िलों में से जिन 15 ज़िलों के लिये आंकड़े सत्यापित किए जा सकते हैं, उनमें अरावली क्षेत्र पूरे भूभाग का लगभग 33 प्रतिशत है। नयी परिभाषा के तहत इन अरावली क्षेत्रों में से कितना हिस्सा बाहर कर दिया जाएगा और खनन तथा अन्य विकास कार्यों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा-इस बारे में किसी भी तरह की स्पष्टता नहीं है। उनका कहना था कि अगर पर्यावरण मंत्री के सुझाव के अनुसार स्थानीय प्रोफाइल को आधार बनाया जाता है, तो 100 मीटर से अधिक ऊँचाई वाली कई पहाड़ियाँ भी संरक्षण के दायरे से बाहर हो जाएँगी। संशोधित परिभाषा के बाद दिल्ली-एनसीआर में अरावली की अधिकांश पहाड़ी इलाके रियल एस्टेट विकास के लिए खोल दी जाएँगी, जिससे पर्यावरण पर दबाव और बढ़ेगा।
श्री रमेश ने कहा कि खनन की अनुमति देने के उद्देश्य से सरिस्का टाइगर रिज़र्व की सीमाओं को फिर से परिभाषित करने की अगुवाई कर रहे श्री यादव इस बुनियादी चिंता को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं कि मूल रूप से आपस में जुड़े हुए पारिस्थितिकी तंत्र का विखंडन उसके पारिस्थितिकी मूल्य को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचाता है और इसके दुष्परिणाम देश के अन्य हिस्सों में पहले से ही देखे जा रहे हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित