जयपुर , दिसम्बर 08 -- राजस्थान में भारत सेवा संस्थान अरावली पर्वत श्रृंखला को अंधाधुंध खनन से बचाने और राजस्थान सहित दिल्ली-एनसीआर के बड़े हिस्से को रेगिस्तान बनने से रोकने के मुद्दे पर 11 दिसम्बर को जयपुर में एक सम्मेलन का आयोजन करेगा।
संस्थान के सचिव और राज्य के पूर्व महाधिवक्ता जी एस बापना ने सोमवार को यहां यह जानकारी देते हुए बताया कि 'विश्व पर्वत दिवस' के मौके पर यह महत्वपूर्ण चर्चा जयपुर में प्राकृत भारती समिति के मालवीय नगर स्थित सेमिनार हॉल में होगी। उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार की रिपोर्ट पर उच्चतम न्यायालय का हालिया निर्णय भले ही अरावली के सन्दर्भ में हो लेकिन इसके दूरगामी असर देश भर की पर्वत श्रृंखलाओं पर होंगे और विकास के नाम पर देर - सबेर यह सब पर्वत श्रृंखला जमींदोज हो जायेगी ।
श्री बापना ने कहा कि रोजगार और विकास के नाम पर केन्द्र सरकार की एक समिति ने उच्चतम न्यायालय को जो रिपोर्ट दी है उसके लागू होते ही अवैध खनन की जो बाढ़ आयेगी वह गुजरात से राजस्थान होकर हिमालय तक फैली देश की सबसे पुरानी अरावली पर्वत श्रृंखला की जड़ों में मट्ठा डालने का काम करेगी। इसमें 100 मीटर से कम ऊंचाई के पर्वतों पर खनन की अनुमति न केवल इन पहाड़ों को नेस्तनाबूद कर देगी अपितु रेगिस्तान को भी तेजी से फैलाने का काम करेगी और इससे प्रदूषण भी बढ़ेगा।
श्री बापना ने कहा कि अब समय आ गया है कि जल, जंगल और जमीन के साथ इंसान को बचाने की फिक्र करने वाले सभी लोगों को एकजुट होकर सरकारों के ऐसे कदमों को रोका जाना चाहिए।
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