अलवर , दिसम्बर 27 -- राजस्थान राज्य पर्यटन निगम के अध्यक्ष रहे धर्मेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा है कि अरावली को बचाने के लिए हम पूरी कोशिश करेंगे और यह मानव जीवन की महत्वपूर्ण रेखा है ।

श्री राठौड़ ने यह बात शनिवार को अरावली बचाओ मार्च में भाग लेने से पहले कही। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने अरावली को लेकर उच्चतम न्यायालयमें जो वाद दायर कराया है और उच्चतम न्यायालय ने सरकार के फैसले पर जो निर्णय दिया है, वह पूरी तरह से प्रकृति के खिलाफ है। इससे प्रकृति का विनाश होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कथनी और करनी में अंतर है।

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की मंशा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि पहले सरिस्का के संकटग्रस्त बाघ आवास (सीटीएच) में परिवर्तन करने की कोशिश की गयी। बड़े खान मालिकों को लाभ पहुंचाने के लिए इतना बड़ा फैसला लिया गया। अब जो 50 खान आवंटित की गयी हैं, उन्हें रद्द किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह चुनिंदा लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया है।

श्री राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा अरावली को बचाने के प्रयास किया और अरावली को बचाने के लिए सबसे पहले जन आंदोलन की शुरुआत भी पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने की है। उन्होंने कहा कि सड़क निकालना या राष्ट्रीय राजमार्ग बनाना एक अलग मुद्दा है, लेकिन अरावली सिर्फ खान मालिकों के लिए खोलना बर्बादी का कारण है।

श्री राठौड़ ने बताया कि कांग्रेस काल में ब्रज में जब खनन के खिलाफ एक साधु ने आत्महत्या की थी, तो तुरंत ही कांग्रेस ने सभी आवंटन निरस्त कर दिये थे। उन्होंने कहा कि यह प्रकृति का मुद्दा है। कांग्रेस अरावली को बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है और आज कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में भी इस पर अंतिम निर्णय लिया जाना है।

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