अबू धाबी , अप्रैल 2 -- अरब और मुस्लिम देशों के एक शक्तिशाली गुट ने इजरायल के नवीनतम कानूनी कदम की तीखी और एकजुट होकर निंदा की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अधिकृत पश्चिम तट में मृत्युदंड की शुरुआत बेहद गंभीर और खतरनाक है, जिसके क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कानून पर दूरगामी परिणाम होंगे।

संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन, तुर्की, मिस्र, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, सऊदी अरब और कतर के विदेश मंत्रियों ने एक कड़े शब्दों वाले संयुक्त बयान में इजरायली संसद नेसेट के पारित कानून की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह प्रभावी रूप से फिलिस्तीनियों के खिलाफ मृत्युदंड का मार्ग प्रशस्त करता है और अधिकृत फिलिस्तीनी क्षेत्र में भेदभाव को और गहरा करता है।

मंत्रियों ने आगाह किया कि इस कदम से क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है, शांति स्थापित करने के लिये किये जा रहे कमजोर प्रयासों को और नुकसान पहुंचा सकता है और पहले से ही बदहाल हालात और ज्यादा खराब हो सकते हैं। उन्होंने इजरायल से संकट को बढ़ाने वाले उपायों को रोकने का आह्वान किया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से जवाबदेही सुनिश्चित करने और शांति बनाए रखने के प्रयासों को तेज करने का आग्रह किया।

इन देशों ने अपने दृढ़ रुख को दोहराते हुए फिलिस्तीनियों को निशाना बनाने वाली इजरायल की नस्लीय भेदभावपूर्ण और दमनकारी नीतियों के प्रति अपना विरोध व्यक्त किया।

उल्लेखनीय है कि इजरायल की संसद नेसेट ने 31 मार्च को एक विवादास्पद विधेयक पारित किया है, जो "आतंकी कृत्यों" में इजरायलियों की हत्या के दोषी पश्चिम तट के फिलिस्तीनियों के लिए मृत्युदंड को अनिवार्य बनाता है।

'द टाइम्स ऑफ इजरायल' की रिपोर्ट के अनुसार इस कानून के तहत सैन्य अदालतों में घातक आतंकवादी कृत्यों के दोषी पाये गये पश्चिम तट के निवासियों के लिए फांसी की सजा एक सामान्य सजा होगी। न्यायाधीश केवल अस्पष्ट रूप से परिभाषित "विशेष परिस्थितियों" के तहत ही आजीवन कारावास की सजा दे सकते हैं। कानून के अनुसार, सजा सुनाए जाने के 90 दिनों के भीतर मृत्युदंड दिया जाना है, जिसे 180 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है।

इस विधेयक की व्यापक रूप से निंदा की जा रही है और इसे "भेदभावपूर्ण" बताया जा रहा है। यूरोपीय देशों, मानवाधिकार समूहों और फिलिस्तीनी प्राधिकरण ने दो अलग-अलग कानूनी व्यवस्था बनाने के लिए इस कानून की आलोचना की है। पश्चिम तट के फिलिस्तीनियों पर सैन्य अदालतों में अनिवार्य मृत्युदंड के तहत मुकदमा चलाया जाता है, जबकि पूर्वी यरुशलम के फिलिस्तीनी निवासियों सहित इजरायली नागरिकों पर नागरिक अदालतों में उन कानूनों के तहत मुकदमा चलाया जाता है जो काफी हद तक यहूदी अपराधियों को ऐसी सजाओं से बाहर रखते हैं।

इस विधेयक को सोमवार को 120 सीटों वाली नेसेट में 62 मतों के साथ मंजूरी दी गई, जिसमें प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी शामिल थे, जबकि 48 ने इसके विरोध में मतदान किया और एक सदस्य अनुपस्थित रहा। यह कानून कट्टर दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन ग्विर के नेतृत्व में लाया गया था।

इस विधेयक को 'एसोसिएशन फॉर सिविल राइट्स इन इजरायल' सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दे रही है।

ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली ने अपनी "गहरी चिंता" व्यक्त करते हुए कहा कि इस विधेयक से "लोकतांत्रिक सिद्धांतों के संबंध में इजरायल की प्रतिबद्धताओं को नुकसान पहुंचने" का जोखिम है।

हमास ने सोमवार शाम एक बयान में कहा कि विधेयक की मंजूरी इजरायली जेलों में बंद फिलिस्तीनी कैदियों के "जीवन के लिए खतरा" है, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से फिलिस्तीनी कैदियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

एमनेस्टी इंटरनेशनल और ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली सहित कई यूरोपीय देशों ने "गहरी चिंता" व्यक्त की और चेतावनी दी कि यह कानून इजरायल की लोकतांत्रिक प्रतिबद्धताओं को कमजोर कर सकता है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित