तेहरान , जनवरी 25 -- ईरान के शक्तिशाली अर्धसैनिक बल 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (आईआरजीसी) के कमांडर ने चेतावनी दी है कि उनकी सेना 'ट्रिगर पर उंगली रखे पहले से कहीं अधिक तैयार' है। यह बयान तब आया है जब अमेरिकी युद्धपोत मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहे हैं।

गौरतलब है कि आईआरजीसी ने ही हालिया देशव्यापी प्रदर्शनों को कुचलने में मुख्य भूमिका निभायी थी, जिसमें हजारों लोग मारे गये थे।

ईरान में 28 दिसंबर से शुरू हुए इन प्रदर्शनों की वजह से उसका अमेरिका के साथ भू-राजनीतिक तनाव बना हुआ है। हालांकि प्रदर्शनों की शुरुआत रियाल (ईरानी मुद्रा) की गिरती कीमत और आर्थिक बदहाली के विरोध में हुई थी, लेकिन जल्द ही यह शासन विरोधी आंदोलन में बदल गया, जिसमें राजशाही के समर्थन में नारे लगे।

कार्यकर्ताओं और विश्लेषकों का मानना है कि 1979 की क्रांति के बाद से सुरक्षा बलों द्वारा किया गया यह अब तक का सबसे खूनी दमन है। भले ही पिछले कुछ दिनों में सार्वजनिक प्रदर्शन कम हुए हैं, लेकिन कार्यकर्ताओं का कहना है कि मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इंटरनेट पर पूरी तरह प्रतिबंध के कारण सटीक जानकारी मिलने में परेशानी हो रही है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या या सामूहिक मृत्युदंड के खिलाफ बार-बार चेतावनी दी है। उन्होंने सैन्य हस्तक्षेप की धमकी देते हुए इन हरकतों को "रेड लाइन" करार दिया है। श्री ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिकी चेतावनी के बाद ईरान ने 800 बंदियों की फांसी रोक दी है, जिसे ईरानी अभियोजक ने सिरे से खारिज कर दिया।

अमेरिकी नौसेना के अनुसार विमान वाहक पोत 'यूएसएस अब्राहम लिंकन' और अन्य युद्धपोत हिंद महासागर में मौजूद हैं। इस तनाव के कारण कम से कम दो यूरोपीय एयरलाइंस ने क्षेत्र के लिए अपनी उड़ानें निलंबित कर दी हैं।

ईरान के इतिहास के इस सबसे लंबे इंटरनेट ब्लैकआउट के बीच सूचनाएं धीरे-धीरे बाहर आ रही हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी (एचआरएएनए) ने मरने वालों की संख्या 5,137 और गिरफ्तारियों की संख्या 27,700 बतायी है। हालांकि 'ईरान इंटरनेशनल' ने 12,000 और संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत माई सातो ने चिकित्सा स्रोतों के हवाले से यह संख्या 20,000 से अधिक होने का अंदेशा जताया है।

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