न्यूयॉर्क , मार्च 11 -- संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने कहा कि गत 28 फरवरी से अमेरिका-इजरायल के सैन्य हमलों में ईरान में 1,300 से अधिक नागरिक मारे गए हैं और 9,669 नागरिक ठिकाने नष्ट हो गए हैं।

श्री इरावानी ने मंगलवार को प्रेस को दिए एक बयान में बताया कि नष्ट किए गए नागरिक ठिकानों में 7,943 आवासीय घर, 1,617 वाणिज्यिक और सेवा केंद्र, 32 चिकित्सा सुविधाएं, 65 स्कूल और शैक्षणिक संस्थान, रेड क्रिसेंट की 13 इमारतें और कई ऊर्जा आपूर्ति सुविधाएं शामिल हैं।

उन्होंने कहा, "वे (अमेरिका-इजरायल) जानबूझकर और अंधाधुंध तरीके से मेरे देश के नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहे हैं। वे अंतरराष्ट्रीय कानून का कोई सम्मान नहीं कर रहे हैं और इन अपराधों को करने में कोई संयम नहीं दिखा रहे हैं।"श्री इरावानी ने कहा कि घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों और महत्वपूर्ण नागरिक बुनियादी ढांचे को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यह आंकड़ें वास्तविक नहीं हैं, इनमें बढ़ोतरी हो सकती है।

ईरान के राजदूत ने नागरिक बुनियादी ढांचों पर हमलों का उल्लेख करते हुए बताया कि शनिवार रात तेहरान और अन्य शहरों में ईंधन भंडारण केंद्रों पर भारी हमले किये गये, जिससे वातावरण में बड़ी मात्रा में खतरनाक और जहरीले प्रदूषक फैल गए हैं।

ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी का हवाला देते हुए श्री इरावानी ने कहा कि इन विस्फोटों के कारण गंभीर वायु प्रदूषण हुआ और नागरिकों, विशेष रूप से बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर स्वास्थ्य स्थिति वाले लोगों के लिए स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो गए हैं।

उन्होंने कहा, "ये जघन्य हमले अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय दायित्वों का भी उल्लंघन करते हैं, जिनमें जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन और जैविक विविधता पर कन्वेंशन के तहत आने वाले नियम शामिल हैं।"श्री इरावानी ने अन्य उदाहरणों का भी जिक्र किया, जिनमें शनिवार तड़के तेहरान के मेहराबाद हवाई अड्डे पर हुए हमले शामिल हैं, जिससे कई नागरिक विमान और सुविधाएं नष्ट या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गईं। इसके अलावा होर्मोज़गन प्रांत के केशम द्वीप पर एक मीठे पानी के संयत्र पर हमला किया गया, जिससे 30 गांवों की जल आपूर्ति बाधित हो गई।

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