बर्लिन , जनवरी 24 -- जर्मनी की एक सांसद ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की "अनिश्चित और अप्रत्याशित" नीतियों का हवाला देते हुए अमेरिका में रखे देश के स्वर्ण भंडार को स्वदेश वापस लाने की मांग की है।
जर्मनी की फ्री डेमोक्रेटिक पार्टी (एफडीपी) की सांसद मैरी-एग्नेस स्ट्रैक-जिम्मरमैन ने जर्मन पत्रिका डेर श्पीगल से कहा कि बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच स्वर्ण भंडार को अमेरिका में रखना अब स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि भंडार की वापसी से जर्मनी की आर्थिक और सुरक्षा नीति में संप्रभुता मजबूत होगी। सुश्री स्ट्रैक-जिम्मरमैन ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में यह कदम रणनीतिक जोखिम को कम कर सकता है।
उन्होंने कहा, "वैश्विक अनिश्चितताओं के इस दौर में और राष्ट्रपति ट्रंप की अप्रत्याशित अमेरिकी नीतियों के तहत यह अब स्वीकार्य नहीं है कि 1,230 टन से अधिक की कीमत के जर्मनी के लगभग 37 प्रतिशत स्वर्ण भंडार न्यूयॉर्क में रखे जाएं।"जर्मनी का केंद्रीय बैंक बुंडेसबैंक वर्तमान में न्यूयॉर्क स्थित अमेरिकी केंद्रीय रिजर्व में 1,236 टन सोना रखता है, जिसकी कीमत लगभग 178 अरब डॉलर आंकी गयी है। ऐतिहासिक कारणों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जुड़ी सुविधाओं के चलते दशकों से जर्मनी के स्वर्ण भंडार का एक बड़ा हिस्सा विदेशों में रखा जाता रहा है।
सुश्री स्ट्रैक-जिम्मरमैन ने कहा कि शीत युद्ध के दौर में यह व्यवस्था उचित थी, लेकिन मौजूदा भू-राजनीतिक परिदृश्य में इसकी प्रासंगिकता समाप्त हो चुकी है। उन्होंने तर्क दिया कि "ट्रांस-अटलांटिक साझेदारों" पर सिर्फ "भरोसा" आर्थिक और सुरक्षा नीति में संप्रभुता का विकल्प नहीं हो सकता।
उल्लेखनीय है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के आर्थिक उछाल के दौरान जर्मनी ने अपने स्वर्ण भंडार का एक हिस्सा विदेशों में जमा किया था। वर्ष 2013 से 2017 के बीच जर्मनी ने न्यूयॉर्क और पेरिस से कुछ सोना वापस मंगाया था। वर्तमान में जर्मनी के लगभग आधे स्वर्ण भंडार देश में हैं, जबकि शेष न्यूयॉर्क और लंदन में रखे गए हैं। इस बीच, वैश्विक स्तर पर स्वर्ण कीमतों में तेज उछाल देखा गया है। पिछले चार वर्षों में सोने की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और केवल 2025 में ही इसमें करीब 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गयी है। इस तेजी के पीछे केंद्रीय बैंकों की बढ़ती मांग, महंगाई को लेकर चिंताएं और भू-राजनीतिक तनाव प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।
इस सप्ताह सोने का भाव रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया और प्रति औंस (28.35 ग्राम) 4,860 डॉलर से ऊपर चला गया। यह उछाल राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा यूरोपीय देशों के खिलाफ नये शुल्क लगाने की धमकियों के बाद देखा गया।
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