बेंगलुरु , फरवरी 19 -- भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंध तेजी से एक रणनीतिक और व्यापक साझेदारी में बदल गए हैं, जो मुख्य रूप से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने पर केंद्रित है।

अमेरिकी अधिकारी एडमिरल सैमुअल जे पापारो के 14-19 फरवरी के भारत दौरे ने दोनों साझेदारों के बीच इस सैन्य सहयोग की गहराई का संकेत दिया है।

अमेरिका हिंद-प्रशांत कमान के कमांडर का नयी दिल्ली, चंडीमंदिर और बेंगलुरु का दौरा जमीन, समुद्र, हवा, अंतरिक्ष और साइबरस्पेस डोमेन में जुड़ाव से एक बड़े बदलाव को दिखाता है।

एडमिरल पापारो ने नयी दिल्ली में रक्षा प्रमुख अनिल चौहान और नौसेना प्रमुख दिनेश कुमार त्रिपाठी के साथ विस्तार से चर्चा की, जिसमें अंतरसंचालनीयता, लॉजिस्टिक्स कोऑर्डिनेशन और एक स्वतंत्र तथा मुक्त एवं हिंद-प्रशांत की सुरक्षा में भारत की बढ़ती भूमिका पर फोकस किया गया।

गौरतलब है कि यह रणनीति अक्टूबर 2025 से बन रही है, जब अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कुआलालंपुर में दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संगठन (आशियान) की बैठक में अमेरिका-भारत रक्षा साझेदारी फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए गए थे। 10 साल के इस फ्रेमवर्क को अब तक के द्वीपक्षीय रक्षा संबंध की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना बताया जा रहा है, जो उन्नत प्रौद्योगिकी, संयुक्त क्षमता निर्माण और समन्वित क्षेत्रीय तालमेल के क्षेत्र में बढ़े हुए सहयोग का रास्ता तय करता है।

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