चेन्नई , मई 01 -- भारत से चोरी की गयी और लगभग 1.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर (132.82 करोड़ रुपये) मूल्य की कुल 657 प्राचीन कलाकृतियां अमेरिका ने भारत को लौटा दी है।
इन पुरावशेषों को आपराधिक तस्करी नेटवर्क की विस्तृत जांच के बाद बरामद किया गया था, जिसमें कुख्यात पुरावशेष तस्कर सुभाष कपूर और नैन्सी वीनर से जुड़े नेटवर्क भी शामिल हैं।
एक आधिकारिक बयान में, मैनहट्टन के डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी एल्विन एल. ब्रैग ने भारत के लोगों को लगभग 1.4 करोड़ डॉलर मूल्य के 657 पुरावशेषों की वापसी की घोषणा की। "ये कलाकृतियाँ आपराधिक तस्करी नेटवर्क की कई जारी जांचों के दौरान बरामद की गयीं। इनमें कथित पुरावशेष तस्कर सुभाष कपूर और दोषी ठहरायी गयी तस्कर नैन्सी वीनर के नेटवर्क शामिल हैं।"ये कलाकृतियां न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूतावास की काउंसिल राजलक्ष्मी कदम की उपस्थिति में एक समारोह के दौरान लौटायी गयीं।
डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी ब्रैग ने कहा, "भारत की सांस्कृतिक विरासत को निशाना बनाने वाले तस्करी नेटवर्क का पैमाना बहुत बड़ा है, जैसा 600 से अधिक कलाकृतियों की वापसी से सिद्ध होता है।" उन्होंने कहा, "दुर्भाग्य से, चोरी की गयी कलाकृतियों को भारत वापस भेजने के लिए अभी और काम किया जाना बाकी है और मैं अपनी टीम को उनके निरंतर प्रयासों के लिए धन्यवाद देता हूं।"न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूत विनय प्रधान ने कहा, "मैं मैनहट्टन डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी कार्यालय, अमेरिकी होमलैंड सुरक्षा विभाग और उन कानून प्रवर्तन एजेंसियों के निरंतर सहयोग के लिए प्रशंसा करता हूं, जिनकी सतर्कता ने इन सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण कलाकृतियों की बरामदगी और वापसी को संभव बनाया है।"लौटायी जा रही कलाकृतियों में 'अवलोकितेश्वर' की एक कांस्य प्रतिमा शामिल है, जो सिंहों से घिरे सिंहासन पर एक उत्कीर्ण दोहरे कमल के आधार पर विराजमान है। प्रतिमा पर मौजूद लेख इस शिल्पकार की पहचान सिपुर के द्रोणादित्य के रूप में करता है, जो वर्तमान छत्तीसगढ़ राज्य में रायपुर के पास स्थित है।
यह अवलोकितेश्वर प्रतिमा 1939 में लक्ष्मण मंदिर के पास मिले कांस्य के एक बड़े भंडार का हिस्सा थी और 1952 तक रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय के संग्रह में शामिल हो गयी थी। इस अवलोकितेश्वर प्रतिमा को संग्रहालय से चुराकर 1982 तक अमेरिका तस्करी कर ले जाया गया था, जो अंततः 2014 तक न्यूयॉर्क के एक निजी संग्रह में पहुंच गई। 20 लाख डॉलर मूल्य की इस कांस्य प्रतिमा को 2025 में इस कार्यालय के उसी संग्रह से बरामद और जब्त किया गया था।
लाल बलुआ पत्थर से बनी बुद्ध की एक प्रतिमा, जो सुरक्षा की मुद्रा यानी 'अभय-मुद्रा' में अपना दाहिना हाथ उठाये खड़ी है। बुद्ध के पैर घुटनों के नीचे से टूटे हुए हैं और उनके सिर के पीछे के प्रभामंडल के केवल कुछ अंश ही दिखाई दे रहे हैं। यह क्षति संभवतः तब हुई थी, जब इस प्रतिमा को उत्तर भारत से लूटा गया था।
लगभग 75 लाख डॉलर मूल्य (71.15 करोड़ रुपये) की इस प्रतिमा को तस्करी कर सुभाष कपूर न्यूयॉर्क लाया था और इसे 'पुरावशेष तस्करी इकाई' ने कपूर के न्यूयॉर्क स्थित एक स्टोरेज यूनिट से जब्त किया था। नृत्य करते हुए गणेश की बलुआ पत्थर की एक मूर्ति, जिसे कपूर के आरोपित सह-षड्यंत्रकारियों में से एक रंजीत 'शांतू' कंवर ने साल 2000 में भारत के मध्य प्रदेश के एक मंदिर से लूटा था।
दोषी तस्कर वामन घिया ने तब इस गणेश प्रतिमा को बेचा और न्यूयॉर्क स्थित गैलरी मालिक डोरिस वीनर को भेज दिया। वर्ष 2012 में अपनी मां डोरिस की मौत के बाद नैन्सी वीनर ने जानबूझकर इस गणेश प्रतिमा के लिए फर्जी स्रोत तैयार किये और इसे न्यूयॉर्क के 'क्रिस्टीज' नीलामी घर में बिक्री के लिए सौंप दिया। नैन्सी को बाद में इस कार्यालय के पुरावशेषों की तस्करी के लिए दोषी ठहराया गया था। इस गणेश प्रतिमा को 2012 की नीलामी में एक निजी संग्रहकर्ता ने खरीदा था, जिन्होंने इस साल की शुरुआत में इसे इस कार्यालय को सौंप दिया।
एक दशक से अधिक समय से डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी की 'पुरावशेष तस्करी इकाई' ने 'होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशन्स' के कानून प्रवर्तन भागीदारों के साथ मिलकर दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों से कलाकृतियों की कथित अवैध लूट, निर्यात और बिक्री के लिए कपूर और उनके सह-षड्यंत्रकारियों की जांच की है।
डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी कार्यालय ने 2012 में कपूर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट प्राप्त किया था। नवंबर 2019 में उस पर और उसके सात सह-अभियुक्तों पर चोरी के पुरावशेषों की तस्करी के षड्यंत्र का आरोप लगाया गया था।
भारत से कपूर का प्रत्यर्पण अभी लंबित है, जहां उसे 2022 में उनकी तस्करी गतिविधियों के लिए दोषी ठहराया गया था। कपूर के पांच सह-अभियुक्तों को पहले ही इस कार्यालय से दोषी ठहराया जा चुका है। इसमें उसके दो आरोपित सह-अभियुक्तों के साथ-साथ तीन अन्य तस्कर भी शामिल हैं, जिन पर अलग से मामला दर्ज किया गया था।
पुरावशेष तस्करी इकाई ने अब तक 48.5 करोड़ डॉलर (4,601.41 करोड़ रुपये) से अधिक मूल्य के 6,200 से अधिक सांस्कृतिक खजाने बरामद किये हैं। इनमें दुर्लभ पुस्तकें, कलाकृतियां और पुरावशेष शामिल हैं। इनमें से अब तक 5,900 से अधिक कलाकृतियां 36 देशों को लौटायी जा चुकी हैं। एटीयू ने सांस्कृतिक संपत्ति से जुड़े अपराधों में 18 व्यक्तियों को दोषी भी ठहराया है, जबकि 7 अन्य कथित तस्करों का प्रत्यर्पण लंबित है।
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